उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने मंगलवार को काबीना मंत्रियों की मौजूदगी में सरकार को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और उसे जुड़े विकास कार्य से लोग संतुष्ट नहीं हैं। सरकार हर काम में पारदर्शिता बरते और हर माह पब्लिक ऑडिट कराए।
चार धामों से संबंधित कानून बनाने का अपने सुझाव को अनसुना करने पर भी नाराजगी जताई। राज्यपाल ने कहा कि सरकार अगर पंडे, पुरोहितों से डरती है तो कुर्सी छोड़ दे। डॉ. कुरैशी राजभवन में आयोजित एक पुस्तक के विमोचन समारोह में बोल रहे थे।
सरकार की कार्यशैली पर पहले भी कई बार सवाल उठाने वाले राज्यपाल के तेवर एक बार फिर तल्ख दिखे। केदारनाथ में जून 2013 में आई आपदा पर हुए सेमीनार से संबंधित पुस्तक के लोकार्पण समारोह में वित्त और उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हृदयेश, कृषि एवं उद्यान मंत्री हरक सिंह पर्यटन मंत्री दिनेश धनै भी मौजूद थे।
धामों में अव्यवस्था पर सरकार को झिड़का
राज्यपाल ने तीन-तीन मंत्रियों की मौजूदगी में कहा कि वह सरकार को चारों धामों के लिए एक एक्ट बनाने को कह रहे हैं। पर सरकार ध्यान ही नहीं दे रही है। पहली बार जब बदरीनाथ मंदिर गया था तो मंदिर से सटे अतिक्रमण को हटाने के लिए डीएम, एसएसपी को कहा था।
कहा कि उस समय डीएम का कहना था कि मंदिर के किनारे अतिक्रमण भी मंदिर वालों का ही है। सरकार अगर पंडे, पुरोहितों से डरती है तो छोड़ दे कुर्सी को। राज्यपाल ने कहा कि कितने लोग केदारनाथ और अन्य धाम जाएंगे संख्या भी नियंत्रित करनी चाहिए।
राज्यपाल के मुताबिक बदरीनाथ मंदिर के 500 वर्ग फुट के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए। वहां सिर्फ बगीचा हो। केदारनाथ के रास्ते में हर दुकानदार का लाइसेंस हो। वह उसी सामान को बेचे जिसके लिए उसे लाइसेंस मिला है। राज्यपाल ने कहा कि कुछ कड़वे सच सरकार को स्वीकार करने होंगे वरना उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ी किसी को माफ नहीं करेगी।
‘...तो मुझे अधिकार नहीं, ऐसे राज्य का गवर्नर रहूं’
राज्यपाल ने कहा कि रेड क्रास की बैठक में उन्हें बताया गया कि पहाड़ में 20 प्रतिशत लोगों ने दवा की गोली नहीं देखी। अगर ऐसा है तो कोई अधिकार नहीं है कि मैं ऐसे राज्य का गवर्नर रहूं। किसी को कोई अधिकार नहीं है कि आजादी के इतने साल बाद भी ऐसे हालात के बावजूद कोई कुर्सी पर बैठे।
हर निर्देश का होगा पालन: मुख्यमंत्री
समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत भी आमंत्रित थे। पर मुख्यमंत्री समारोह खत्म होने के बाद पहुंचे। राज्यपाल के सरकार को दी गई नसीहत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजभवन के एक-एक निर्देश का पालन किया जाएगा। सरकार विकास कार्य में पूरी पारदर्शिता बरत रही है।
कुलपतियों को भी सलाह
सेमीनार के शोध पत्र और अन्य लेख दो साल बाद अपडेट कीजिए। उस भाषा में छपवाइए और बंटवाइए जो लोगों की जुबान हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो पहाड़ के उस आदमी का भला हो पाएगा। पहाड़ में इंसान को जीने का अधिकार नहीं मिल पाया है।