बता दें कि नारी निकेतन में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी संवासिनी के साथ दुष्कर्म व गर्भपात, पांच संवासिनियों का नारी निकेतन से भागने का प्रकरण, नारी एवं बाल गृह में बच्चों के साथ उत्पीड़न का मामला सामने आ चुका है। हमेशा ही यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। हर बार प्रशासन और सरकार व्यवस्थाओं में सुधार के दावे करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से कोई न कोई खामी उजागर हो जाती है।
फिर मामले को दबाने का प्रयास
चार संवासिनियों की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाकी का स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नारी निकेतन में जाकर उपचार किया। हैरत की बात ये है कि नारी निकेतन की जिम्मेदारी संभाल रहा जिला प्रोबेशन विभाग मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 28 नहीं, सिर्फ चार संवासिनियों की तबीयत खराब हुई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने 28 संवासिनियां उल्टी, दस्त व बुखार से पीड़ित होनी बताई हैं। बीमार संवासिनियों में चार मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं।