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चीड़ के पेड़ काटने के लिए SC जाएगी सरकार

Wed, 26 Aug 2015 02:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश के जंगलों से चीड़ के हरे पेड़ों को काट कर हटाया जाएगा। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने बताया कि चीड़ के पेड़ों से जंगल को नुकसान हो रहा है। वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं और वन्य जीव भाग रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि जंगलों से चीड़ के हरे पेड़ काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति ली जाएगी। इस संबंध में पहले कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा फिर सुप्रीम कोर्ट आवेदन भेजा जाएगा।

वन मंत्री अग्रवाल ने बताया कि चीड़ के पत्तों (पिरूल) की वजह से वनाग्नि का खतरा रहता है। लोगों को अनुमति दे दी गई है कि वे बिना किसी शुल्क के वनों से पिरूल उठाकर ले जा सकते हैं।
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तो खत्म हो जाएंगे जंगल
बताया कि चीड़ के वनों में नई पौध नहीं आ रही है। जंगलों में अधिकांश पुराने पेड़ रह गए हैं। पहले इनकी वृद्धि 2.8 घन मीटर प्रति वर्ष थी और अब 1 घन मीटर प्रति वर्ष रह गई है। पेड़ों की वर्तमान गणना के सर्वे के मुताबिक पांच वृक्षों में से दो को तत्काल हटाना आवश्यक है।

वन मंत्री ने कहा कि चीड़ की वजह से दूसरी वनस्पतियां पैदा नहीं होतीं। मध्य और प्रौढ़ वर्ग के चीड़ के पेड़ 20 साल में खत्म हो जाएंगे। इसके बाद वन खाली हो जाएंगे। इसके पहले वन मंत्री ने चीड़ के पेड़ों को काटने के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक भी की।
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