सरकारी स्कूलों में अब बच्चों के लिए मिड-डे-मील बनाने का झंझट नहीं रहेगा, शिक्षक भी भोजन बनाने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर पूरा ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर दे सकेंगे। उत्तराखंड के चार जिलों में करीब 80 करोड़ की लागत से आधुनिक तकनीक से सेंट्रलाइज्ड किचन विकसित करने की योजना है।
18 करोड़ रुपये की एक किचन से कई स्कूलों के बच्चों के लिए एक साथ खाना तैयार हो सकेगा। यही नहीं ऑटोमेटिक मशीनों से खाने की पौष्टिकता और गुणवत्ता पर भी विशेष नजर रहेगी। खास बात यह है कि सेंट्रलाइज्ड किचन बनाने के लिए सरकार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि इसके लिए उद्यमियों के सहयोग से धन जुटाया जाएगा।
शुरुआत में देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार में आधुनिक तकनीक से सेंट्रलाइज्ड किचन विकसित किए जाएंगे। एक किचन को तैयार करने में करीब 18 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
विटामिन की मात्रा और गुणवत्ता का आकलन करेगी मशीन
file photo
सेंट्रलाइज्ड किचन की खासियत यह होगी कि खाना पकाते समय उसे हाथ से नहीं छूना पड़ेगा। खाना बनाने का सारा काम स्वचालित मशीनों से होगा। मशीन ही खाने में विटामिन की मात्रा और गुणवत्ता का आकलन कर देगी।
एक सेंट्रलाइज्ड किचन में करीब डेढ़ लाख बच्चों का खाना एक साथ बन सकता है। जिसे ट्रांसपोर्ट के माध्यम से विभिन्न स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। यह भी सुनिश्चित होगा कि बच्चों तक ठंडा खाना न पहुंचे, अगर किचन में खाने का तापमान 90 डिग्री सेेल्सियस है, तो बच्चों की थाली तक खाना 60 डिग्री सेल्सियस तापमान तक गरम रहेगा।
सेंट्रलाइज्ड किचन को विकसित करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। इससे बच्चों को स्वच्छ और पौष्टिक खाना मिलेगा। अगर खाने में दाल, चावल, दलिया, खीर, रोटी या अन्य चीजें बनाई जाती है, तो मशीन खाने में विटामिन की मात्रा बता देगी। अभी तक स्कूलों में खाने की पौष्टिकता और गुणवत्ता मापने की कोई व्यवस्था नहीं है। राज्य में पहली से आठवीं कक्षा तक करीब आठ लाख बच्चों को मिड-डे-मील योजना के तहत दोपहर का भोजन दिया जाता है।
सरकार का प्रयास शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। स्कूलों में टीचर केवल पढ़ाने का ही काम करें और बच्चों को अच्छा खाना मिले। इसके लिए प्रदेश के चार जिलों में सेंट्रलाइज्ड किचन विकसित किए जाएंगे। जिस पर करीब 80 करोड़ तक खर्च होने का अनुमान है। सेंट्रलाइज्ड किचन विकसित होने से कई स्कूलों के बच्चों का भोजन एक ही जगह पर तैयार होगा। इससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
- अरविंद पांडेय, शिक्षा मंत्री