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पुलिस के 'मिशन आक्रोश' पर सरकार नरम, देगी इंक्रीमेंट

Wed, 26 Aug 2015 02:24 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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आक्रोशित पुलिस जवानों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए राज्य सरकार में सहमति बन गई है। सरकार ने फिलहाल सैद्धांतिक तौर पर पुलिस कांस्टेबलों को नोशनल (काल्पनिक) इंक्रीमेंट देने का फैसला लिया है।
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इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार को 50-60 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार वहन करना होगा। इस बारे पुलिस मुख्यालय ने ही शासन को प्रस्ताव भेजा था। सीएम ने मंगलवार को अचानक बैठक बुलाई और अपनी सहमति दे दी।

पुलिस जवानों की वेतन विसंगति को लेकर सरकार में कुछ इसी तरह की सहमति बनी कि ना तुम जीते और ना हम हारे। दरअसल, आक्रोशित कांस्टेबलो के रिवाइज ग्रेड-पे दिसम्बर 2011 के आधार पर शासनादेश की तिथि से ही काल्पनिक व वास्तविक दोनों माना गया है।
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यदि इस काल्पनिक आदेश जनवरी 2006 से मान लिया जाए तो खर्च भी कम होगा और भविष्य में ज्यादा लाभ मिलेगा। कुछ इसी तरह का प्रस्ताव पीएचक्यू ने तैयार किया।

नोशनल इक्रीमेंट देने पर सीएम ने दी सहमति

पहले यह बैठक सोमवार रात्रि में नौ बजे होनी थी, लेकिन मुख्य सचिव राकेश शर्मा के उपलब्ध नहीं होने के चलते मंगलवार की सुबह बुलाई गई। बैठक में सीएम ने इस प्रस्ताव को सहमति दे दी। इसके बाद फाइल का मूंवमेंट शासन में बन गया। फिलहाल नोशनल इंक्रीमेंट देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई।

क्या है नोशनल वेतन वृद्धि
पुलिसकर्मियों की मांग है दिसम्बर 2011 के रिवाइज ग्रेड-पे केआधार पर एरियर केभुगतान एक जनवरी 2006 से किया जाए। इस पर सरकार के 110 करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे। लेकिन सरकार ने अब नोशनल वेतन वृद्धि देने का फैसला लिया।

इस प्रक्रिया केतहत एक जनवरी 2006 के बीच पुलिसकर्मियों के जितने भी इंक्रीमेंट बनते होंगे, उन सभी का एक साथ फिक्सेशन कर जो वेतनमान दिसम्बर 2011 में बनेगा, उस पर दिसम्बर 2011 से एरियर दिया जाएगा, लेकिन इस वेतनमान को काल्पनिक रूप से 2006 से ही माना जाएगा। ऐसा करने से सातवें वेतनमान में इस कांस्टेबलों को उतना ही लाभ मिलेगा जितना और लोगों को मिलना है।
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जवान अनुशासन की लक्ष्मण रेखा न लांघे: सीएम

पीएचक्यू से प्रस्ताव आया था कि जनवरी 2006 से कांस्टेबलों को नोशनल इंक्रीमेंट दे दिया जाए। मैंने भी उस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। क्योंकि यदि यह लाभ दूसरों को मिला है तो इन्हें भी मिलना चाहिए, लेकिन यह भी कहा है कि पुलिस के जवान अनुशासन की लक्ष्मण रेखा को पार ना करे।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री

तय होगी जिम्मेदारों की जवाबदेही भी
सुबह बुलाई गई बैठक में महकमे में बयानबाजी पर भी सीएम ने नाराजगी जताई। सूत्रों की माने तो सीएम का मानना है कि मुख्य सचिव के बयान के बाद अलग-अलग बयानबाजी करने से भी माहौल बिगड़ा है। सुबह नौ बजे हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि जहां-जहां ये घटनाएं हुई है वहां तैनात वरिष्ठ अफसरों की जवाबदेही भी तय होगी।

कई दिन पहले से वायरल हुई इस खबर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखने की जवाबदेही तय करने का काम गृह विभाग करेगा। कुछ वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को इस बात के लिए नोटिस जारी किए जाने की संभावना भी है।
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