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नागरिकता संशोधन कानून में हिंदुओं से न मांगे जाएं कोई दस्तावेज: प्रवीण तोगड़िया

Sun, 05 Jan 2020 10:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • कहा, सीएए सही पर सरकार बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को दिखाए देश से बाहर का रास्ता
  • केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राममंदिर बन रहा है पर रामराज्य की अभी कमी
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प्रवीण तोगड़िया - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लागू कर अच्छा निर्णय लिया है, लेकिन हिंदुओं से इस संबंध में कोई दस्तावेज न मांगे जाएं। अगर दस्तावेज मांगने हैं तो देश में बाहर से आकर बसे मुस्लिमों से मांगे जाएं। उन्होंने कहा कि राममंदिर तो बन रहा है, लेकिन देश में अभी रामराज्य आना बाकी है।

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शनिवार को रुड़की पहुंचने पर आदर्श नगर स्थित हिंदूवादी नेता उमेश प्रधान के आवास पर डॉ. प्रवीण तोगड़िया का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। यहां प्रेसवार्ता में तोगड़िया ने कहा कि हमने राम मंदिर के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। इसी का नतीजा है कि आज राममंदिर बनने जा रहा है, लेकिन अभी रामराज्य आना बाकी है।

इसके लिए सरकार को महिलाओं और हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार को खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर में बसे हिंदू शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। सरकार को कश्मीरी हिंदुओं की रक्षा करनी चाहिए।
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केंद्र सरकार के नागरिका संशोधन कानून (सीएए) का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत हिंदुओं से दस्तावेज नहीं मांगे जाने चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह बाहरी मुस्लिमों को बाहर का रास्ता दिखाए। डॉ. तोगड़िया ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि उन्होंने हमेशा हिंदुओं की लड़ाई लड़ी, लेकिन जो इस लड़ाई में उनके साथ थे, वे रास्ता भटक कर दिल्ली की तरफ चले गए हैं।

हिंदुस्तान के पीड़ित हिंदुओं की सुध ले सरकार

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया ने संशोधन नागरिकता कानून (सीएए) का समर्थन करने के साथ कहा कि केंद्र सरकार को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रह रहे हिंदुओं से पहले हिंदुस्तान में ही शरणार्थी बनकर रह रहे हिंदुओं की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कश्मीर से निकाले गए हिंदू अपने घर कब लौटेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार की कई नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि एक साल पहले तक 73 प्रतिशत भारत में राज कर रही भाजपा अब केवल 37 प्रतिशत तक सिमट गई है। 

शनिवार को जयराम आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि देश में नागरिकता संशोधन कानून बनना ठीक है। सरकार के इस कदम का हम स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं की चिंता करने वाली सरकार को मुसलमानों द्वारा ननकाना साहब में किए गए हमले को गंभीरता पूर्वक लेना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जिस तरह से 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान पर हमला किया था उसी तर्ज पर सरकार को पाकिस्तान पर हमला कर उसके दो टुकड़े कर देने चाहिए। एक हिस्से में हिंदुओं के लिए अलग देश बनाकर उसकी राजधानी ननकाना साहब को घोषित कर देनी चाहिए। 

 राम मंदिर को लेकर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले का स्वागत करते हुए प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि करीब 450 साल बाद हिंदू समाज को विजय मिली है। उन्होंने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष इस फैसले का श्रेय लेना चाहता है तो उचित नहीं है। इस मौके पर समाजसेवी डा.  विशाल गर्ग, विवेक गर्ग, विक्रम सिंह, जेपी बडोनी, वीर गुर्जर आदि मौजूद रहे। 
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चारधाम देवस्थानम एक्ट के मामले में उत्तराखंड सरकार को चुनौती

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम एक्ट के मामले में हिंदूवादी नेता डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने सरकार को चुनौती दी है। डॉ. तोगड़िया ने कहा कि यदि उत्तराखंड सरकार में हिम्मत है तो वह यहां की मस्जिदों और चर्चों को अधिग्रहित करके दिखाए। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि विकास के नाम पर क्या मंदिर ही हड़पे जाएंगे? चुटकी लेते हुए कहा कि यदि यह सब विकास के नाम पर हो रहा है तो मस्जिदों और चर्चों का भी विकास करके दिखाए सरकार। 

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया शनिवार को प्रदेश की राजधानी में एक पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा, विहिप और आरएसएस लगातार तीस सालों से मंदिरों के अधिग्रहण की बात का विरोध करती आ रही थी, लेकिन अब भाजपा ने जो किया वह क्या आदर्शों के खिलाफ नहीं है?

एनडी तिवारी इस एक्ट को ला रहे थे तो वो गलत थे, लेकिन वर्तमान सरकार लाई तो वह गलत नहीं है। उन्होंने पिछले दिनों शराब फैक्ट्री के मामले को भी इसके जैसा ही बताया। कहा कि हरीश रावत यहां शराब की फैक्ट्री लगा रही थी तो वह गलत थी, लेकिन अब भाजपा ने लगाई तो वह सही कैसे हो गई? यह सरकार का दोहरा रवैया नहीं तो और क्या है। 
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