भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने केदारनाथ आपदा पीड़ितों की मदद के लिए प्रदेश सरकार की अब तक कोशिशों पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री हरीश रावत इतने असंवेदनशील है कि उन्हें विस्थापन से संबंधित गांवों की सही जानकारी भी नहीं है।
विस्थापन प्रक्रिया के लिए सरकार आज तक कोई सर्वे नहीं कर पाई है। सरकार द्वारा आपदा पीड़ितों को जो मुआवजा बांटा गया उसमें भी अनियमितता बरती गई है। एक फर्जी सोसायटी बनाकर सरकार ने करोड़ों रुपये का भुगतान अपने चहेतों को किया है।
फर्जी मुआवजा पाने वालों को माफी
बताया कि जिलाधिकारी द्वारा फर्जी मुआवजा पाने वाले लोगों से वसूली का आदेश जारी किया गया, तो मुख्यमंत्री ने इस विषय को कैबिनेट में लाकर ऐसे लोगों को माफी दे दी गई। भट्ट ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा है कि केदार धाम में बिना मास्टर प्लान के कार्य हो रहे हैं।
यदि सरकार ने कोई मास्टर प्लान बनाया है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट है कि केदारनाथ के घाट निर्माण में कई खामियां हैं, अगर इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा के हर एक पीड़ित के पुनर्वास की बात कही थी। स्थिति यह है कि आज तक एक भी पीड़ित का पुनर्वास नहीं हुआ है।