राज्य के विभिन्न इलाकों में संचालित सैकड़ों स्टोन क्रशर के संचालकों पर सरकार एक बार फिर मेहरबान होती नजर आ रही है। सरकार स्टोन क्रशर को क्लस्टर विकसित कर नदियों से स्थानांतरित करने के बजाए आसान नीति बनाने जा रही है। ताकि स्टोन क्रशर संचालकों को राहत दी जा सके। यह स्थिति तब है जब एनजीटी और केंद्र ने राज्य सरकार को क्लस्टर विकसित कर स्टोन क्रशर्स को नदियों से स्थानांतरित करने का सख्त फरमान जारी किया है।
प्रदेश भर में संचालित स्टोन क्रशर्स को क्लस्टर विकसित कर स्थानांतरित किया जाना है। यह कार्य दो साल से किया जा रहा है, लेकिन सरकार स्टोन क्रशर का स्थानांतरण तो दूर कलस्टर के लिए जमीन तक चिह्नित नहीं कर पाई है।
सरकार ने स्थानांतरण की तिथि 31 जुलाई तक बढ़ाई, बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। अब सरकार स्टोन क्रशर संचालकों पर एक बार फिर मेहरबान नजर आ रही है।
तो ये है वजह
कैबिनेट मंत्री नवप्रभात का कहना है कि क्लस्टर विकसित कर स्टोन क्रशर्स को नदियों से स्थानांतरित किया जाना आसान नहीं है। इसलिए अब सरकार नई आसान नीति बनाने जा रही है ताकि स्टोन क्रशर्स को राहत दी जा सके।
सूत्रों की मानें तो इसके पीछे स्टोन क्रशर संचालकों का भारी दबाव है। ज्यादातर स्टोन क्रशर नदियों की कोख में संचालित है और वहां से हटाकर ले जाने में संचालकों को पूरा तामझाम समेटने के साथ ही मुनाफे में कमी आ सकती है। ऐसे में स्टोन क्रशर संचालक नहीं चाहते हैं कि क्लस्टर विकसित कर स्थानांतरण हो।