उत्तराखंड के लक्सर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के शुरुआती नारे की याद दिलाई। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि पार्टी गठन के समय एक नारा चला था कि जो जमीन सरकारी वो जमीन हमारी। यह तभी संभव होगा जब मास्टर-की हमारे हाथ में हो।
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उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को आरक्षण के खिलाफ बताते हुए अंदरखाने मिलीभगत कर साजिश करने का आरोप लगाया। साथ ही दलित-मुस्लिम समीकरण को साधने का प्रयास भी किया।
लक्सर में हरिद्वार रोड पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए दशकों बीत गए, लेकिन आज भी दलितों और अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
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भाजपा-कांग्रेस खत्म करना चाहती हैं आरक्षण
मायावती ने दलित-मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की।
- फोटो : AmarUjala
केंद्र में भाजपा और कांग्रेस की सरकार ने इनके साथ हमेशा भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया है और इन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। आज भी बीजेपी और कांग्रेस की अंदरखाने मिली भगत है।
दोनों ही विरोधी पार्टियां आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही हैं। यही कारण है कि बीजेपी और आरएसएस आरक्षण की फिर से समीक्षा की बात कह रहे हैं।
नोटबंदी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जनता के बजाए पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है। नोटबंदी से न सिर्फ हमारी आर्थिक अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव पड़ा है, बल्कि 90 प्रतिशत जनता परेशान हुई है।
भाजपा ने अपना कालाधन लगा दिया ठिकाने
लक्सर में मायावती की रैली में अच्छी भीड़ रही।
- फोटो : AmarUjala
उन्होंने कहा कि नोटबंदी से मोदी की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कारण कि उन्होंने चहेतों का कालाधन पहले ही ठिकाने लगवा दिया। बीएसपी की ओर से बार-बार सवाल उठाने पर भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
इससे साबित होता है कि दाल में थोड़ा नहीं बल्कि पूरी दाल काली है। धनबल के सहारे ही बीजेपी अब उत्तराखंड में सत्ता का सपना देख रही है, जिसका हमें वोट के माध्यम से जवाब देना है।
लक्सर में जनसभा को संबोधित करने के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते, लेकिन नरेंद्र मोदी स्वयं तो शीशे के घर में रहते हैं पर दूसरों पर पत्थर फेंकना नहीं भूलते हैं।
उन्होंने कहा कि बीजेपी में व्यापम सहित तमाम घोटालों के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरों पर ही आरोप लगाते हैं, जबकि अपने अंदर झांकने का प्रयास नहीं करते हैं।