उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में एक जनवरी से शुल्क (यूजर्स चार्ज) बढ़ गया है। इससे अस्पतालों में इलाज की दरों में न्यूनतम 10 फीसदी वृद्धि हो गई है।
2010 से हर साल हो रही बढ़ोतरी
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 से यह बढ़ोतरी प्रतिवर्ष हो रही है। स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के नाम पर शुल्क में वृद्धि की जाती है। इसमें अल्ट्रासाउंड, एक्स रे, पैथोलॉजी टेस्ट आदि के रेट में 10 फीसदी वृद्धि अनिवार्य है।
यह प्रावधान स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभागों के लिए भी है जो नागरिक सेवाओं के एवज में शुल्क लेते हैं। वर्ष 2012 में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने हर साल शुल्क नहीं बढ़ाने का निर्देश दिया था, लेकिन वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई।
इसके बाद मंत्री को अपने फैसले से पीछे हटना पड़ा था। इसके बाद एक वर्ष छोड़कर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन यह भी वित्त की आपत्ति के बाद ठंडे बस्ते में चला गया।
गौर करने वाली बात ये है कि खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद दरें बढ़ाने का कई बार विरोध भी हुआ, लेकिन अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।
कितना रुपए बढ़ा शुल्क
अस्पताल में दाखिला - 74 - 81
ओपीडी पर्ची - 14 - 15
ईसीजी - 74 - 81
अल्ट्रासाउंड - 74 - 81
सामान्य ऑपरेशन - 146 - 161
बड़ा ऑपरेशन - 731 - 804
प्लास्टर - 146 - 160
दांत निकालना - 37 - 41
अल्ट्रासाउंड - 293 - 322
एक्सरे - 102 - 112