चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में वोटरों को रिझाने के लिए सरकार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। चाहे फिर कोई हत्यारा, डकैत या फिर फसादी ही क्यों न हो। इन दिनों प्रदेश के तमाम जिलों में दर्ज मुकदमों की वापसी का क्रम शुरू हुआ है।
आलम यह है कि मुकदमा वापसी के पूर्व यह भी देखना लाजमी नहीं समझा जा रहा है कि जिस मुकदमे को वापस लिया जा रहा है, वह किन धाराओं में दर्ज है। उस पर न्याय विभाग और जिलाधिकारी की टिप्पणी क्या है।
डोईवाला के गुरमीत सिंह पर विभिन्न आरोपों में डोईवाला थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज हुए थे। अपराध संख्या 171/91 और 276/93 में इसका पूरा ब्यौरा है। बीते दिनों आनन-फानन में गुरमीत सिंह के परिजनों की ओर से एक पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
इस पत्र पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू करते हुए गृह विभाग की ओर से जिलाधिकारी और न्याय विभाग से आख्या मांगी गई। मामला काफी पुराना होने के नाते इसका रिकॉर्ड थाने में नहीं मिला। इसके बाद पुलिस आफिस में सुरक्षित रखे गए पुराने रिकार्ड को खंगालने की कवायद शुरू हुई।