सरकारी नौकरी वाले अब यह सपना भूल जाएं और अगर इस सपने को पूरा करने के लिए अनजाने में भी कोई गलती की तो बेहद पछताना पड़ेगा।
विज्ञापन
2 of 11
teacher
सरकार ने सख्त रूख अपनाते हुए कुछ सरकारी नौकरी में तैनात कर्मचारियों के नए नियम बनाए है। आगे पढ़िए क्या है अब नए नियम...
विज्ञापन
3 of 11
Transfer
सरकारी सेवा में तैनात लोकसेवक तबादले के लिए यदि माता-पिता, पत्नी या अन्य रिश्तेदारों से प्रार्थना पत्र दिलवाता है या किसी की सिफारिश कराने का प्रयास करता है तो उसे तबादला अधिनियम के तहत सजा के दायरे में माना जाएगा।
4 of 11
Transfer
विधानसभा में ध्वनिमत से पारित प्रवर समिति की सिफारिश पर पेश संशोधित उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण विधेयक 2017 में यह प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम प्रदेश के सभी विभागों, निगमों, व नगर निकायों आदि में भी लागू किया जा सकेगा।
विज्ञापन
5 of 11
तबादले
- फोटो : डेमो पिक
संशोधित विधेयक में यह व्यवस्था है कि अगर कोई अपना तबादला रुकवाने के लिए परिजनों का आवेदन इस्तेमाल करता है तो इसको कर्मचारी की व्यक्तिगत फाइल में रखा जाएगा और ऐसे आवेदनों को आगे नहीं भेजा जाएगा।
विज्ञापन
6 of 11
ट्रांसफर
- फोटो : demo pic
इसको कर्मचारी की सालाना गोपनीय प्रविष्टि में भी अंकित किया जाएगा। अगर कोई कर्मचारी किसी से सिफारिश लगवाता है या अनुचित दबाव बनाता है तो उसे कर्मचारी द्वारा सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा और उसके विरुद्ध उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 203 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
7 of 11
trivendra singh rawat
जो कर्मचारी तबादला अधिनियम का उल्लंघन कर किसी तबादला आदेश का तय समय सीमा के अंदर पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सामान्य स्थानांतरण के लिए समय सारिणी भी तय की गई है।
8 of 11
trivendra singh rawat
हर साल 31 मार्च से तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। विधेयक में अनिवार्य तबादलों में सुगम से दुर्गम व दुर्गम से सुगम में तबादले से छूट के मामलों में कई गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। विधेयक में जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक तैनाती वाले विभागों के लिए दुर्गम-सुगम के मानक निर्धारित करने के लिए अगल-अलग स्तर की समितियों का प्रावधान किया गया है।
9 of 11
Jobs
जिला मुख्यालय से ग्राम स्तर तक तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी दुर्गम-सुगम चिह्नित करेगी। लेकिन 70 हजार फीट की ऊंचाई वाले स्थान पर एक साल की तैनाती दुर्गम की दो साल की तैनाती मानी जाएगी।
10 of 11
कर्मचारी
जिला मुख्यालय, तहसील, विकास खंड, नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत क्षेत्र में तैनाती वाले कर्मियों के दुर्गम सुगम का निर्धारण मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी। जिन कार्मिकों की तैनाती केवल जिला मुख्यालय, निदेशालय मुख्यालय पर की जाती है और जिनका तबादला शासन या विभागाध्यक्ष स्तर पर होता है उनके लिए विभाग की जरूरत के हिसाब से सुगम व दुर्गम का निर्धारण होगा।
तबादला अधिनियम बन जाने के बाद तबादलों में पारदर्शिता होगी और दुर्गम क्षेत्रों में जाने से कतराने वाले लोकसेवकों को वहां भेजा जा सकेगा। कोई सिफारिश नहीं चलेगी। पात्र लोगों को ही सुगम-दुर्गम में तैनाती का लाभ मिलेगा। अधिनियम निकायों पर लागू हो सकता है।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्यमंत्री।