प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य घोषित करते हुए विगत सत्र का गन्ना मूल्य यथावत रखा है। प्रदेश सरकार के गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाने से किसानों में खासी नाराजगी है। ऐसे में किसान सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सात दिसंबर को गन्ना मूल्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद से प्रदेश में गन्ना मूल्य घोषित होने का इंतजार किया जा रहा था। हर साल प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश के तर्ज पर ही गन्ना मूल्य घोषित करती है। प्रदेश सरकार ने सोमवार की शाम गन्ना मूल्य घोषित कर दिया है। इसमें विगत पेराई सत्र का गन्ना मूल्य यथावत रखा गया है।
गन्ना मूल्य पिछले साल जितना रखे जाने की खबर सुनते ही रुड़की और हरिद्वार के किसानों में आक्रोश पनप गया। किसान राकेश कुमार, विजयपाल, अमित रोड, महिपाल सिंह, नाथीराम, इकबाल सिंह, जावेद अली, फुरकार, सहीराम, विकास कुमार, राजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि प्रदेश सरकार किसान विरोधी है। कहा कि प्रत्येक वर्ष सरकार एक या दो रुपये बढ़ा देती थी, लेकिन इस बार तो प्रदेश सरकार ने हदें पार कर दी हैं।
प्रदेश सरकार ने एक पाई भी नहीं बढ़ाई है। किसान नेताओं ने तंज कसा कि प्रदेश सरकार का यह फैसला उन भाजपा नेताओं को आइना है, जो किसानों के बीच खड़े होकर कहते हैं कि भाजपा सरकार किसानों की आय 2022 तक दोगुनी कर देगी। किसान नेताओं ने कहा कि प्रत्येक फसल की लागत बढ़ती जा रही है। जबकि किसानों की आय बढ़नी तो दूर उल्टी घटती जा रही है। क्योंकि प्रतिवर्ष फसल उत्पादन का खर्च बढ़ रहा है।