केंद्रीय योजनाओं के तहत हर साल जारी होने वाले हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रदेश की सरकारें समय पर इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। केंद्रीय योजनाओं के तहत हर साल जारी होने वाले हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रदेश की सरकारें समय पर इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं।
इसकी सबसे ताजा बानगी विशेष योजनागत सहायता-पुनर्निर्माण (एसपीए-आर) योजना है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में आई भीषण आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए हजारों करोड़ रुपये की सहायता देनी है।
इस मद में केंद्र हर वित्तीय वर्ष में सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि जारी करता है। लेकिन आंकड़े सरकारी तंत्र की सुस्त रफ्तार की गवाही पेश कर रहे हैं। आमतौर पर बजट की कमी को लेकर विलाप करने वाला सरकारी सिस्टम (एसपीए-आर) के तहत जारी बजट का इस्तेमाल नहीं कर सका।
इस कारण चार साल बाद भी आपदा में ध्वस्त हुए पुलों, सड़कों, नहरों का निर्माण नहीं हो सका। अब डबल इंजन की सरकार ने केंद्रीय इमदाद का भरपूर इस्तेमाल करने को लेकर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत खुद मैदान में उतर रहे हैं। वह पांच दिसंबर को छह महीनों के दौरान केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करेंगे।
चार साल में 1100 करोड़ में से 675 करोड़ ही खर्चे
आरटीआई से प्राप्त सूचना के मुताबिक, वर्ष 2013 से 2016-17 की अवधि में केंद्र सरकार ने एसपीए-आर मद में उत्तराखंड सरकार को 1099.29 करोड़ रुपये की राशि जारी की। लेकिन राज्य सरकार के स्तर पर 825.61 करोड़ रुपये की राशि ही जारी हो सकी।
इसके सापेक्ष भी उत्तराखंड सरकार ने महज 675.70 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो सरकार खर्च की रफ्तार बढ़ाती तो उसी अनुपात में इस मद में केंद्रीय इमदाद की राशि भी बढ़ती।