उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (आरक्षण में आरक्षण की व्यवस्था) के मसले पर फंसी सरकार को एक बार फिर स्पष्ट करना पड़ा है कि आंदोलनकारियों को आरक्षण देने का फैसला सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किया जा चुका है।
कैबिनेट ने यह भी फैसला किया है कि अब तक चिह्नित और आगे चिह्नित होने वाले आंदोलनकारियों को इसका लाभ दिया जाएगा। तदर्थ पीटीए शिक्षकों को भी नियमित करने का फैसला कैबिनेट ने किया है।
मंगलवार को एक बार फिर अपर मुख्य सचिव एस राजू, प्रमुख सचिव कृषि एस रामास्वामी और प्रभारी सचिव गृह विनोद शर्मा ने कैबिनेट के फैसलों की मीडिया को जानकारी दी। कहा गया कि सोमवार को देर होने के कारण कैबिनेट के फैसले पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाए थे।
गैरसैंण सत्र में आ सकता है आरक्षण विधेयक
विनोद शर्मा के मुताबिक अब तक 9600 आंदोलनकारियों को चिह्नित किया जा चुका है। आगे भी चिह्नित किए जाने वाले राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण के दायरे में लाया जाएगा। इस काम को करने के लिए सरकार विधेयक लाएगी। विधेयक आगे आने वाले गैरसैंण विधानसभा सत्र में लाया जा सकता है।
विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रमुख सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में सचिव न्याय और सचिव गृह की कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है। कमेटी जल्द ही यह प्रारूप तैयार कर लेगी।
एस राजू ने बताया कि तदर्थ पीटीए शिक्षकों को भी नियमित करने का फैसला कैबिनेट ने किया है। इस फैसले से 222 तदर्थ शिक्षक नियमित होंगे।
पीटीए शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता साफ
15000 मानदेय पा रहे पीटीए शिक्षकों को तदर्थ बनाने पर अभी फैसला होना बाकी है। इस मामले को एसीएस सोमवार की प्रेस ब्रीफिंग में सामने नहीं रख पाए थे।
रमसा में लैब टेक्नीशियन के 1868 नए पद सृजित करने पर कैबिनेट ने सहमति दी थी। इन पदों पर पहले से ही कार्यरत कार्मिकों को 10 से लेकर 15 प्रतिशत तक का अधिमान दिया जा सकता है।
बताया गया कि अग्निशमन सेवा की नियमावली को अगली बैठक में रखने का निर्देश दिया गया है। कैबिनेट ने विधि विज्ञान (फॉरसेनिक साइंस) प्रयोगशाला के ढांचे को मंजूरी दे दी है। बताया गया कि मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 70 मामले रखे गए।
हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है प्रभावी
राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के मसले पर फिलहाल उच्च न्यायालय नैनीताल का स्थगन आदेश प्रभावी है।
हाईकोर्ट की इस रोक के खिलाफ सरकार पूर्व में सुप्रीम कोर्ट भी गई थी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हाईकोर्ट में ही मामले को सुलझाने के लिए कहा था।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आरक्षण देने से पहले सरकार यह बताए कि किस नीति या कानून के तहत राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण दिया जा रहा है।