देश की आजादी के लिए अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने वाले शिवराज सिंह फर्त्याल आज अपनों से हार गए हैं।
शिवराज सिंह के दशकों के संघर्ष के बाद सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान दिया। मगर सरकार ने उनके परिवार को स्वतंत्रता सेनानी कोटे से जमीन और सुविधाएं तो नहीं दी, उल्टा उनकी ही पैतृक जमीन अधिग्रहण कर ली। जमीन के मुआवजे के लिए पिछले एक दशक से उनका परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा निवासी शिवराज सिंह फर्त्याल का परिवार हल्द्वानी अमरावती कालोनी फेज तीन में रहता है। शिवराज सिंह ने आजादी के लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ झंडा बुलंद किया। तब वे अल्मोड़ा जीआईसी में पढ़ते थे।
92 वर्षीय शिवराज सिंह बताते हैं कि आजादी की मशाल जलाने पर उन्हें और उनके साथियों को स्कूल से कोडे़ मारकर निकाल दिया। उन्हें 19 कोड़े मारे गए। शिवराज सिंह बताते हैं कि इसके बाद भी उनकी हिम्मत नहीं टूटी। अल्मोड़ा में आंदोलन में प्रतिभाग किया।