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गोवर्धन पूजा पर हुए भजन-कीर्तन

Mon, 04 Nov 2013 11:09 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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दीपावली के बाद सोमवार को शहरभर में गोवर्धन पूजा की गई। मंदिरों में ठाकुर जी का विशेष श्रंगार हुआ। भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। सुबह-शाम भजन-कीर्तन हुए। पटेलनगर स्थित श्री श्याम सुंदर मंदिर में तजेंद्र हरजाई, भूपेंद्र चड्डा, चंद्रमोहन आनंद भजन गायकों ने तेरे माथे तिलक गोपी गोगिया, श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे तिलक विराज रहे आदि भजनों पर श्रद्धालुओं को झूमाया।
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मंदिर के पुजारी मगनानंद और बलराम जोशी ने गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना कर कार्तिक मास की कथा सुनाई। कालिका माता मंदिर में पूजन के साथ ही गऊओं का पूजन किया गया। प्रतीक मैनी ने बताया कि सुबह से ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। गीता भवन, राधा-कृष्ण मंदिर, श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर आदि जगहों पर भजन-कीर्तनों के साथ ही ठाकुर जी को भोग लगाया गया।

भागवत में वर्णन
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि भागवत के दशम स्कंध के पच्चीसवें अध्याय में गोवर्धन पूजन का वर्णन मिलता है। इस दिन भगवान को 56 प्रकार के भोग लगाने और गायों की पूजा करने से पुण्य मिलता है।
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ये है प्रचलित कथा
द्वापर युग में दीपावली के दूसरे दिन ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा हुआ करती थी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि कार्तिक में इंद्र की पूजा का लाभ नहीं, इसलिए हमें गोवंश की उन्नति के लिए पर्वत एवं वृक्षों की पूजा कर उनकी रक्षा की प्रतिज्ञा करनी चाहिए। पर्वतों और भूमि पर घास-पौधे लगाकर वन-महोत्सव भी मनाना चाहिए।

श्रीकृष्ण का यह उपदेश सुन ब्रजवासियों ने ज्यों ही पर्वत, वन और गोबर की पूजा शुरू की इंद्र कुपित होकर सात दिन तक घनघोर वर्षा करते रहे। इस पर कान्हा ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर ब्रज को बचा लिया। फलत: इंद्र को लज्जित होकर सातवें दिन क्षमा याचना करनी पड़ी। तभी से समस्त उत्तर भारत में गोवर्धन पूजा प्रचलित हुई।

आज भाई दूज
पांच पर्वों का त्योहार मंगलवार को भाई-दूज के साथ ही संपन्न हो जाएगा। इस मौके के लिए जहां बहनों ने गोले और मिठाई लेकर भाईयों के तिलक की तैयारी की है। वहीं भाईयों ने भी बहनों के लिए आकर्षक तोहफे ले लिए हैं। आचार्य सुशांत राज ने बताया कि भाई दूज का शुभ मुहूर्त द्वितीया तिथि में ही है। यानी 1 बजकर 16 मिनट तक यह पर्व मनाना शुभ रहेगा।
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