कांग्रेस के एक बड़ी मूछ-दाड़ी वाले नेता की चिंता हर दिन तेज रफ्तार से बढ़ रही है। चिंता स्वाभाविक भी है। उनके निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी सरकार खासी सक्रिय है।
रात-दिन दौरे हो रहे हैं। बड़ी मूछों वाले नेता की चिंता यह है कि बड़ी सरकार कहीं अपने ही जुगाड़ में न लगी हो। अपना न सही तो अपने पुत्र के लिए ही खेत तैयार कर रही हो। फिर पुत्र मोह को तो धृतराष्ट्र भी नहीं छोड़ पाए।
गंधारी ने आंखों पर पट्टी बांध ली थी। अब चुनाव भी किसी महाभारत से कम तो नही है। अब बड़ी सरकार अपनी न सही अपने बेटे के लिए ही जमीन तैयार कर रही हो तो मूछों को कोई पूछने से रहा। लिहाजा इनकी कोशिश होती है कि बड़ी सरकार के हर कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दिखाते रहें।
इधर, अपनी भी सक्रियता बढ़ाई है। जनता का हाल चाल खुद भी पूछने निकल रहे हैं। पर चुनाव में तो पहली बिसात टिकटों की ही होती है। इस बाजी को जीतने की चिंता है कि खाये जा रही है।