देहरादून के एक कॉलेज में जल्द ही एक सेमिनार का आयोजन होना है। आयोजनकर्ता शिक्षक इसलिए परेशान हैं कि इसमें देशभर से आने वाले विशेषज्ञों के खाने पीने का इंतजाम कहां से होगा, क्योंकि इसके लिए कोई ऐसा बजट नहीं है।
अब शिक्षकों ने प्राइवेट कॉलेजों और स्कूलों का रुख किया है। दरअसल, स्पांसर इसलिए नहीं मिल रहे हैं क्योंकि सेमिनार का जो टॉपिक है, उसमें प्राइवेट स्कूलों की ब्रांडिंग नहीं होगी।
बल्कि निजी शिक्षक संस्थानों का तर्क है कि ऐसे टॉपिक के सेमिनार को तो कोई सुनना भी पसंद नहीं करेगा। अब कॉलेज को तो यूजीसी के नियम का पालन करना है।