विधानसभा सत्र चल रहा था और एक हनक वाले मंत्री के आफिस में काफी लोग जमा थे। इसी बीच एक दो खबरनवीसों ने भी एंट्री मारी। कुछ विधायकगण भी मौजूद थे। शहर की यातायात व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई और यही दर्द झलका कि राजधानी में चलना दूभर हो गया है।
किसी सज्जन ने कहा कि इस मामले में कुछ करवाइए मंत्री जी, आपसे तो थोड़ा बहुत डर भी जाएंगे ये वर्दी वाले। मंत्री जी बोले, कि भैय्या बात ऐसी है कि शहर के हालात तो खराब हैं ही इसमें कोई शक नहीं। लेकिन सच ये भी है कि एक पुराने कप्तान ने इस शहर को स्वर्ग बना दिया था। चकाचक यातायात व्यवस्था थी, कहीं जाम का झाम नहीं। क्या नाम था उसका भला....।
किसी सज्जन ने कहा कि खुराना जी थे उस वक्त कप्तान। मंत्री बोले, हां वही। उस कप्तान ने शहर को जाम मुक्त कर दिया था लेकिन लोग उसे ही गाली देने लगे, जाने के बाद उसकी अहमियत समझ में आई, अब खुद को कोसने और जाम झेलने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।