सचिवालय में एक बड़े साहब इलेक्ट्रानिक्स सामान के बेपनाह शौकीन हैं। वक्त साथ है तो साहब की भी तूती बोलती है।
सूबे के मुखिया की नाक के बाल भी कहे जाते हैं। इसलिए मुंह से निकली बात बंदूक की गोली की तरह होती है। साहब ने अपने विभाग में कहलवा दिया कि उन्हें लैपटॉप चाहिए वो भी डेढ़ लाख वाला।
विभाग में करंट दौड़ गया, साहब को कौन बताए लैपटॉप के लिए 25 हजार तक ही खर्च किया जा सकता है। विभाग जोड़-घटाने में जुटा था तभी साहब खुद बाजार गए मनपसंद डेढ़ लखिया लैपटॉप खरीदकर बिल बाउचर विभाग पर दे मारा।
विभाग परेशान है कि साहब के लैपटॉप का भुगतान किस मद से करें। एक ओर कुआं तो दूसरी ओर खाई है। नियमत: इतनी कीमत के लैपटॉप का बिल पास नहीं हो सकता और साहब को बिल पास न होने की जानकारी देना भी मुसीबत है। लिहाजा चंदा जुटाने का निर्णय हुआ है।
अब सूबे के मुखिया को कौन बताए कि उनके दरबार के नवरत्नों में बीरबल तो कोई नहीं लेकिन ‘मुल्ला दो प्याजा’ कई हैं।