पुलिस के जिला ऑफिस में एक युवक काम करता है। इशारों से बात किया करता है बेचारा। युवक अवैतनिक सेवा देता है और अधिकारियों का मुंह लगा हुआ है। ऑफिस में हैसियत इतनी कि एक बार एक कांस्टेबल ने उसे चिढ़ा दिया और दूसरे दिन कांस्टेबल का ट्रांसफर हो गया।
अक्सर कांस्टेबल बुदबुदाते हुए मिलते हैं
अधिकारी उस पर इस कदर फिदा हैं कि उसके खिलाफ एक शब्द सुनना पसंद नहीं करते। करें भी क्यों न पंसद। जो भी अधिकारी कार से उतरे, उसे पूरे प्रोटोकोल के साथ उसके ऑफिस तक छोड़ता है। उससे खुश अधिकारी कभी सौ का नोट तो कभी पांच सौ नोट उसके हाथ में थमा देते हैं। किसी की मजाल की कोई उसकी तरफ आंख उठा कर भी देख ले। हड़काना तो दूर की बात है।
वह इशारों से मुंछे बनाता और कांस्टेबल को डराता है की वह मुंछो वाले अधिकारी से शिकायत कर वर्दी उतरवा देगा। हर कांस्टेबल उससे खुन्नस खाए बैठा है। अक्सर कांस्टेबल बुदबुदाते हुए मिल जाते हैं कि जिस दिन साहब का ट्रांसफर हुआ, उस दिन यह पिटा।