निजाम के दरबारियों की संख्या क्या बढ़ गई कि हर कोई खुद को सूरमा साबित करने पर तुला है। एक शूट बूट वाले दरबारी हैं तो एक दिल्ली से लाए गए दरबारी।
निजाम के दरबार में ये निजाम के लिए कम और एक दूसरे की खुफियागिरी करने का काम ज्यादा करते हैं। दरअसल, निजाम का कुमाऊं दौरा हरिद्वार के एक नेताजी ने तय करवाया था। ये नेताजी निजाम परिवार के काफी नजदीकी भी हैं।
इसलिए ये भी कुमाऊं के दौरे पर चले गए। लेकिन दिल्ली से आए एक दरबारी को नेताजी का कुमाऊं में चहलकदमी करना रास नहीं आया। अब इन्हें सीधे तो कह नहीं सकते थे, इसलिए जिन सूचना विभाग के अफसरों के साथ घूम रहे थे, उनकी शिकायत विभाग के मुखिया को फोन पर ही दर्ज करा दी।
इसके बाद तो हड़कंप मच गया और निजाम के कुमाऊं दौरे की कवरेज कराने गई टीम को तत्काल वापस बुला लिया गया। हरिद्वार वाले नेताजी भी कम नहीं थे, उन्होंने भी निजाम से कहा कि ये तो बाहरी हैं, काम तो हम ही आएंगे। अब दरबार में इस मामले की चर्चा जोरों पर है।
सबकी सेहत का रखते हैं ख्याल
तबादला सीजन इन दिनों कई के चेहरों पर रौनक लौटा रहा है। चेहरे सिर्फ उनके ही नहीं खिले जो मनचाही पोस्ट के लिए नेताजी को मनवा ले गए बल्कि उनके भी खिले जो पोस्टिंग रुकवाने में कामयाब रहे।
अब जब कर्मचारियों के चेहरे खिले तो नेता जी के चेहरे में तो खुद ब खुद नूर आएगा। आखिर सबकी सेहत का ख्याल जो रखते हैं। तबादलों की कच्ची पेंसिल वाली लिस्ट मंगवा ली गई है, जिसपर पक्की मुहर लगाने की तैयारी है।
दून में अटैच दर्जन भर के नाम भी मांग लिए हैं। सेहत का हवाला देकर एक वर्ष से दून में डटे हैं सो उनकी नब्ज दोबारा टटोली जा रही है। नेता जी की सबसे अच्छी बात यह है कि तबादलों में किसी की नहीं सुनते।
नीचे से आई तबादला सूची को अपने अनुसार जारी करते हैं। सुने भी क्यों ट्रांसफर सीजन साल में एक बार आता है ऐसे में कोई कोताही हो गई तो कई की सेहत खराब हो जाएगी।