स्त्री को शक्तिस्वरूपा, देवी माना गया है, लेकिन यह मोहतरमा वाकई स्वयं को किसी देवी से कम नहीं समझतीं।
वह धार्मिक कार्यकर्ता के रूप में समाज के बीच जाती हैं तो सूचना के अधिकार की लड़ाई का भी बीड़ा उठाए हुए हैं।
शिक्षिका के रूप में बच्चों को ज्ञान भी बांट आती हैं। इंसान छोड़िए, पशुओं तक की दुर्दशा देखकर इस कदर द्रवित हो जाती हैं कि लोगों के बीच उनकी एक कच्ची-पक्की पहचान पशु कल्याण कार्यकर्ता की भी बन गई है।
समस्या यह हो गई है कि ऑल-इन-वन बनते-बनते वह एक भी काम को ठीक से अंजाम नहीं दे पा रहीं।