वैसे जिला योजना समिति का चुनाव होता तो आम है लेकिन इस बार यह बेवजह खास
हो गया। पहले तो नेता मौज लेते रहे लेकिन अचानक सीरियस हो गए।
पार्षद ने उठाया फायदा
इसी का फायदा एक पार्षद ने उठाया। वैसे तो नेता उनसे जल्दी बात करते न थे लेकिन जैसे ही वह प्रत्याशी बागी हुए, हर कोई उनके पास दौड़कर आने लगा। उनके खाने-पीने का शौक पूरी तरह से पूरा हो रहा था।
कुछ दिन वह कांग्रेस के पाले में रहे। उन्हें बढ़िया से होटल में रखा गया। जब कांग्रेसी उनसे पकने लगे तो उन्होंने ऐसा प्लान रचा कि उनकी पार्टी के लोगों ने ही उन्हें बंधक बना लिया। लोग बोले कि खाओ-पिओ चाहे जितना लेकिन वोट डालने नहीं जाना है।
जब तक चुनाव हुआ उनके खाने-पीने की भरपूर व्यवस्था रही। इसके बाद घर आ गए। बोले-पांच दिन के खाने-पीने का पैसा बचा। ऐसे खाने में तो 10-20 हजार तो खर्च हो ही जाते। लेकिन उनकी पार्टी के नेता बोले कि इससे सबक मिल गया। अब बिना जांचे-परखे किसी को पार्टी में शामिल ही नहीं करेंगे।