ब्यूरोक्रेसी के नए निजाम की लड़ाई चरम पर है। दिल्ली से लौटे सिंह साहब तगड़े दावेदार तो हैं, लेकिन अब तेज गति से बदल रहे समीकरणों से एक बार फिर धुंध छा गई है।
पहले तो पंडित जी की विदाई पर सिंह साहब को ही गद्दी संभालनी थी, लेकिन जब से पंडित जी सरकार की मजबूरी बन गए हैं, तब से सारा नजारा बदला हुआ सा नजर आ रहा है।
इसके पीछे एक वजह यह है कि सिंह साहब ने पिछले दिनों रखे गए प्रस्ताव पर हामी नहीं भरी तो ऊपर यह संदेश दिया गया कि सिंह साहब जब अभी बात नहीं मान रहे हैं तो गद्दी संभालने के बाद की स्थिति सरकार के अनुकूल कैसे रह सकती है।
इसी बीच एक चर्चा ने जन्म लिया और सिंह साहब के स्थान पर राजू भैय्या को गद्दी सौंपने की तैयारी की खबरों ने रफ्तार पकड़ ली। क्योंकि पंडित जी भी जानते है कि उन्हें सिंहासन छोड़ना पड़ेगा।
सिंह साहब को गद्दी मिली तो वह पंडित जी को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन राजू भैय्या तो जेंटलमैन हैं, वह ऐसा शायद ही करें। इसलिए राजू को जेंटलमैन बनाने की चर्चा है।