एक साल पहले शुरू हुई मुख्यमंत्री वृद्ध महिला पोषण योजना में राशन नहीं मिलने से वृद्ध महिलाओं के पोषण पर संकट गहरा गया है।
हर माह की पांच तारीख को मिलने वाले राशन का बजट नहीं अब तक नहीं मिलने से योजना अधर में लटक गई है। इस वजह से लाभार्थी महिलाओं में आक्रोश व्याप्त है। वह धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दे रही हैं।
पात्र महिलाओं का कहना है कि जब सरकार ने योजना लागू की है तो उसे सही तरीके से संचालित भी करे। पात्र महिलाओं की संख्या प्रदेश में 1.5 लाख से ऊपर है, जबकि देहरादून जिले में 18,000 हजार है। हालांकि योजना में संशोधन होने के बाद अब इनकी संख्या में काफी इजाफा हो गया है।
बीते साल नवंबर माह में सरकार ने प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति के लिए वृद्ध महिलाओं का सहयोग लेने का फैसला किया था। इसी के साथ महिलाओं के पोषण के लिए मुख्यमंत्री वृद्ध महिला पोषण योजना को शुरू किया था। योजना की पात्र समाज कल्याण विभाग से पेंशन पा रही वृद्ध महिलाएं थीं।
योजना का क्रियान्वयन महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास अनुभाग द्वारा किया जा रहा है। इसकी मॉनिटरिंग मुख्य विकास अधिकारी कर रहे हैं।
योजना का लाभ पाने के लिए वृद्ध महिलाओं को समूह में रोजाना आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति दर्ज कराकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर नजर रखनी थी, बच्चों को कहानी सुनाने, खिलाने, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मदद को सब्जियां आदि जुटाने का कार्य करना था।
जबकि मिनी केंद्रों पर समूहों द्वारा बारी-बारी से भोजन तैयार करना था। वृद्ध महिलाओं द्वारा ऐसा नहीं करने पर सरकार ने शासनादेश में परिवर्तन कर 250 रुपये का मानक घटाकर 150 रुपये कर दिया। संशोधित शासनादेश के अनुसार महिलाओं को हर माह की पांच तारीख को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास अनुभाग द्वारा एक किग्रा मूंग की दाल, एक किग्रा दलिया और आधा किग्रा चूडा दिया जाता है।
लाभार्थियों की संख्या बढ़ी और योजना बंद?
मुख्यमंत्री वृद्ध महिला पोषण योजना के लाभार्थी के लिए समाज कल्याण से मिल रही पेंशनधारी वृद्ध महिलाओं को ही पात्र माना जाता था। लेकिन जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि योजना में सभी वृद्ध महिलाओं को शामिल किया जाए। इसके बाद विभाग ने सर्वे करके रिपोर्ट शासन को भेजी है।
देहरादून जिले में अब पात्र लोगों की संख्या 18 हजार से बढ़कर 53 हजार हो गई है। प्रदेश में लाखों की संख्या में महिलाओं को योजना से जोड़ा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि योजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की वजह से सरकार ने योजना से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
सरकार ने योजना शुरू की, तो पूरा भी करे
समाज कल्याण विभाग से पेंशन और योजना का लाभ ले रही शांति देवी, प्रेमवती, मायादेवी, कांता, प्रेमवती और लक्ष्मी का कहना है कि सरकार ने जब योजना शुरू थी तो हमारी जैसी महिलाओं की खुशियों का ठिकाना नहीं था।
दाल, चावल और चूडा मिलने से महीने भर का काम चल जाता है। लेकिन अब सरकार ने पैसा और विभाग ने राशन रोक लिया है। इन महिलाओं का कहना है कि जब सरकार ने योजना शुरू की है तो उसे ढंग से चलाए। यदि समय से राशन नहीं मिला तो हम लोग धरना-प्रदर्शन करेंगे।
हमारी पंचायत में कुल 600 पेंशनधारी वृद्ध महिलाएं है। दर्जनों महिलाएं रोजाना घर आकर योजना के राशन के बारे में पूछती हैं। सीडीओ से इस संबंध में वार्ता की जाएगी।
- गीता बिष्ट, उपप्रधान, आर्केडिया ग्राम पंचायत
सर्वे में 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की संख्या अब 53 हजार हो गई है। इस वजह से रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। बजट नहीं मिलने के कारण महिलाओं को राशन नही बांटा जा सका। जल्द ही बजट जारी होने की उम्मीद है।
- डा. एसके सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, देहरादून