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जगजाहिर है मंत्रीजी का महिला प्रेम

Sun, 03 May 2015 06:25 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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सरकार में एक मंत्रीजी का महिला प्रेम जगजाहिर है। पूर्व में भी उन पर कई बार चहेती महिला अधिकारी को प्रति नियुक्ति पर एक विभाग से दूसरे विभाग का अधिकारी बनाने का आरोप लगता रहा है। एक बार फिर उनका महिला प्रेम जागा है। एक आरोपी महिला अधिकारी मंत्री जी ने उसे अपने विभाग में फिर से उसी पद पर बैठा दिया है, जिस पद से उसे हटाया गया था।
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सूचना ‘लॉंड्रिंग’ न करो, खुद बताओ
अल्ट्रासाउंड वालों की मुसीबत हल हो गई है। हर साल डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों का दिल धड़कने लगता था कि कन्या भ्रूण हत्या का मौसमी मुद्दा उछलेगा और अभियान चलेगा। नियमावली के एंगल से देखें तो शहर में एक भी सेंटर ऐसा नहीं है जो कागज-पत्तर के मामले में शत-प्रतिशत खरा हो।

होता यह था कि जिससे टीम की बात नहीं बनती थी उसका गला फंस जाता था। इस साल सेंटरवालों ने सूचना लॉंड्रिंग करना छोड़ दिया है। अब वह खुद साफ-साफ बता रहे हैं कि गलती उनकी है। संचालक टीम को खुद बुला ले रहे हैं कि आओ, यह देखो, गड़बड़ी है, मेरी मशीन सील कर दो। टीमवाले भी मस्त हो गए हैं। डॉक्टर ने बुलाया और जाकर सील कर दी मशीन।
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भुलक्कड़ अधिकारी के किस्से
पुलिस के एक अधिकारी के भुलक्कड़ किस्से इन दिनों हर किसी की जुबां पर हैं। हो भी क्यों ना, पहले तलब करते हैं फिर सवाल करते हैं कि किसलिए आए हो?

इसी तरह टेलीफोन से जुडे़ एक कर्मचारी भी रोजमर्रा भूलने की बीमारी से दो चार हो रहे हैं। यह अपनी कमजोरी से वाकिफ हैं। अधिकांश बातें वह अपनी पर्सनल डायरी में दर्ज कर लेते हैं। चर्चा है कि एक हादसे के बाद से उनकी याददाश्त कमजोर हुई है।

कमरा नंबर तीन से परेशान डॉक्टर
दून अस्पताल में कमरा नंबर तीन से डॉक्टर साहब परेशान हैं। जी हां! वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के इस कमरे में कोई भी डाक्टर ड्यूटी नहीं करना चाहता। इस कमरे में कोई अनहोनी या डरावनी चीज का अंधविश्वास जैसी बात भी नहीं है। दरअसल, अस्पताल में बिलिंग की तीन नंबर खिड़की भी है।

जहां यह खिड़की है वहां कभी तीन नंबर वार्ड होता था। अस्पताल प्रशासन ने बिलिंग काउंटर को भी तीन नंबर नाम दे दिया। अब डाक्टर कोई भी जांच लिखते हैं या भर्ती करते हैं तो बिल कटाने के लिए मरीज या तीमारदार को तीन नंबर में जाने की बात कह देते हैं।

ओपीडी का तीन नंबर कमरा नजदीक होने की वजह से मरीज और तीमारदार वहां बिल जमा करने के बारे में पूछते हैं। कई बार लोग डॉक्टर साहब और दूसरे स्टाफ से झगड़ने भी लगते हैं। परेशान डॉक्टरों ने बिल जमा नहीं होने का पर्चा चस्पा किया, लेकिन बात नहीं बनी है।

उल्टा पड़ गया दांव
एक बड़े शिक्षा संस्थान में इन दिनों उठापटक का खेल चल रहा है। दरअसल, कुछ महीने पहले एक अधिकारी ने दूसरे को रास्ते से हटाने की चाल चली। बड़ा खेल खेला लेकिन सामने वाले अधिकारी की बैटिंग के आगे इनकी गुगली फेल हो गई। बल्लेबाज को इसकी भनक लगी तो वह भी लग गए जनाब को किनारे लगाने की कवायद में।

इस बार ऐसा शॉट मारा कि गेंद बाउंडरी पार। एक महीने तक माहौल तैयार करने के बाद जब उसका परिणाम सामने आया तो जनाब के मुंह से शब्द नहीं निकल रहा है। दिन रात नौकरी जाने का फिक्र खाए जा रही है। जनाब किसी तरह बचाने में लगे हैं और पहले बल्लेबाज अपने इस शॉट का आनंद ले रहे हैं।
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