भाजपा को आगामी दिनों में सूबे का नया सेनापति मिलना है। सभी धुरंधरों ने जोर लगाया है। कोई किसी को रोकने में लगा है तो कोई अपने लिए जमीन तलाश रहा है। लेकिन विश्वासघात भी हो रहा है।
एक छोटे नेता को दिल्ली में बड़े नेताओं से जिस नेताजी ने मिलवाया, वह उसी की राह में गड्ढे खोदने लगा। क्षमता हो या नहीं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष का ओहदा चाहिए। जिन नेताजी के सहारे दिल्ली में पैर जमाए, उन्हें चकमा देकर मिस कारतूस टाइप के कथित दिग्गजों को अपनी पैरवी के लिए दिल्ली पार्टी सुप्रीमो से मिलाने ले गए।
सुप्रीमो को लगा कि उनके विश्वासपात्र आए हैं, उन्होंने उन्हीं का नाम लेकर बाहर से बुलाने को कहा, जिन्होंने छोटे नेताजी को बड़े नेताओं से मिलवाया था। बाहर खड़े नेताओं ने जब नाम सुना तो खिसक लिए और दूसरे कमरे में घुस गए।
इत्तेफ़ाक यह था कि सुप्रीमो के भरोसेमंद सिपहसालार भी वही थें, आवाज सुनी तो अंदर घुसे, लेकिन हैरत में थे कि मैंने यहां आने की खबर तो दी नहीं थी, फिर बुलावा कैसे आया। लेकिन बाद में सारे ड्रामे का पता चला तो हैरत में पड़ गए।