राहगीर ने ही उन्हें रुड़की का रास्ता बताया। इसी बीच रास्ते में उन्हें उत्तराखंड पुलिस एस्कार्ट भी मिल गई। ऐसे में पुलिस एस्कार्ट ही उन्हें आईआईटी लेकर पहुंची। स्मृति ईरानी से स्वयं करीब डेढ़ घंटे लेट होने पर कार्यक्रम के दौरान अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी। वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सवाल उठता है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही केंद्रीय कपड़ा मंत्री दिल्ली से रवाना हुई। फिर उत्तराखंड पुलिस एस्कार्ट उन्हें बॉर्डर पर क्यों नहीं मिल सकी।
मामले में एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के रुड़की पहुंचने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस एस्कार्ट समय से नारसन बार्डर पर पहुंच गए थे। पुलिस एस्कार्ट काफी देर तक उनका इंतजार करते रहे। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री गलत रास्ते पर पहुंच गई है। ऐसे में उनकी जानकारी लेकर एस्कार्ट उन्हें रुड़की आईआईटी लेकर पहुंची।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अपनी वाकपटुता के लिए जानी जाती है। आईआईटी में जब उन्हें संबोधन के लिए उनकी सीट पर ही माइक दिया गया तो उन्होंने सीट के सामने खड़े होने से परहेज किया और संबोधन डेस्क की ओर बढ़ी। इसके बाद उन्होंने छात्रों को अपनी चिरपरिचित शैली में संबोधित किया। इससे सभागार में मौजूद हर व्यक्ति प्रभावित दिखा। एक छात्र ने सवाल पूछते हुए कहा कि वह उन्हें चार साल की उम्र में भी टीवी पर देखता था। छात्र ने पूछा कि टीवी से राजनीतिक जीवन में कदम कैसे बढ़ाया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने जवाब देते हुए सबको ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
उन्होंने कहा कि मैं आभारी हूं कि आपने मेरी उम्र याद दिला दी। इस पर पूरा हाल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि मुझे टीवी सीरियल पर लोगों ने देखा। लेकिन मैंने अपने राजनीतिक जीवन से पहले जो सामाजिक कार्य किए, वे कैमरे में नहीं आए। इसलिए राजनीतिक की जो यात्रा थी, वह हमेशा जारी रही। उन्होंने चुटील अंदाज में चार साल की उम्र देखने के लिए फिर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इसी के चलते उन्हें पे चैक मिलता रहा और उनके बच्चों की पढ़ाई होती रही।