उत्तराखंड के करीब साढ़े चार लाख सरकारी कर्मचारियों की एक मांग पूरी हो गई है। कार और बाइक खरीदने पर अब सरकारी कर्मचारियों को वैट में छूट मिल सकेगी। वैट में छूट संबंधित जारी शासनादेश जिला प्रशासन को मिल गया है।
शासन से जिला प्रशासन और विभागाध्यक्षों तक शासनादेश पहुंचने में 16 महीने का वक्त लग गया। इसकी जानकारी अभी कर्मचारी संगठनों को नहीं है लेकिन जानकारी होने पर वैट में छूट संबंधी नियम-शर्तों पर कर्मचारी विरोध जता सकते हैं।
अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने शासनादेश पर 31 अक्तूबर 2013 को हस्ताक्षर किए थे, लेकिन जिला प्रशासन के पास आदेश की कॉपी दो-चार दिन पहले पहुंची है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और दूसरे कर्मचारी संगठन वाहनों की खरीद पर वैट में छूट की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। लेकिन जीओ जिला प्रशासन तक पहुंच गया है इसकी जानकारी कर्मचारी संगठनों को नहीं है।
यही वजह है कि संयुक्त परिषद के 28-29 फरवरी को होने वाले प्रांतीय अधिवेशन के एजेंडे में यह मांग शामिल की गई है। डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय एनएस डांगी ने बताया कि शासनादेश आ गया है। इसका पालन किया जा रहा है। कर्मचारी पहले वाहन की कीमत के साथ वैट देगा। बाद में वैट की धनराशि वापस की जाएगी। निदेशक कोषागार को प्रतिपूर्ति अधिकारी बनाया गया है।
शर्तें
- दोपहिया वाहन की कीमत 60 हजार (वैट छोड़कर) से अधिक नहीं होगी
- चार पहिया वाहन की कीमत 5 लाख (वैट छोड़कर) से अधिक नहीं होगी
- पूरे सेवाकाल में यह सुविधा सिर्फ एक वाहन के लिए अनुमन्य होगी चाहे दुपहिया हो या चार पहिया
- ऐसा वाहन पांच साल से पहले किसी अन्य व्यक्ति को न तो बेचा जाएगा और न हस्तांतरित किया जाएगा
- कर्मचारी के परिवार में यदि किसी सदस्य के पास वाहन है तो यह सुविधा नहीं मिलेगी
- परिवार में यदि पहले से वाहन है तो उसका रिप्लेसमेंट अनुमन्य होगा
- वैट की प्रतिपूर्ति कर्मचारी के विभागाध्यक्ष के प्रमाण पत्र के आधार पर कोषागार द्वारा कर्मचारी के खाते में भेजी जाएगी
- एक वित्तीय वर्ष में वैट प्रतिपूर्ति की सुविधा एक हजार दुपहिया वाहनों और पांच सौ चार पहिया वाहनों पर दी जाएगी।
- पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर यह सुविधा दी जाएगी।