जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में अखाड़े की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने यह कड़ी कार्रवाई की। बर्खास्त किए गए संतों में हरिद्वार के तीनों संतों के अलावा अखाड़े के श्रीमहंत देवेंद्र पुरी और लखनऊ स्थित जूना अखाड़े की श्रीमहंत पूजा पुरी शामिल हैं।
इन सभी संतों पर घोर अनुशासनहीनता, संदिग्ध गतिविधियों तथा अखाड़े की छवि को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
जूना अखाड़े के राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि ने सोमवार शाम को बताया कि लंबे समय से हरिद्वार जूना अखाड़े के कोठारी मनोहर पुरी और थानापति त्रिकालदर्शी शिवमपुरी की गतिविधियां अखाड़े के विपरीत चल रही थीं। इन दोनों ने अखाड़े को न केवल अपनी निजी संपत्ति समझ लिया था, अपितु त्रिकालदर्शी ने कईं ऐसे कार्य किए जिनसे अखाड़े की प्रतिष्ठा आहत हुई।
श्रीमहंत गोल्डन बाबा को अखाड़े ने रमतापंच तक का दर्जा प्रदान किया था। छानबीन करने पर पाया गया कि उनकी वर्तमान गतिविधियां बेहद संदिग्ध हैं और अतीत में भी उनपर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं।
इन संतों से अब अखाड़े का कोई लेना देना नहीं। चूंकि पांच संतों को दशनाम परंपरा के अनुसार अखाड़े से बर्खास्त किया गया है, इसलिए भविष्य में अखाड़ा जगत में उनकी वापसी असंभव हो गई है।
हरि गिरि ने बताया कि बर्खास्तगी के बाद इनमें से किसी भी बाबा को प्रयाग अर्द्धकुंभ में शाही स्नान के लिए नहीं ले जाया जाएगा।
पांच प्रमुुख संतों की बर्खास्तगी के बाद हरिद्वार के जूना अखाड़े में हड़कंप मच गया। जूना अखाड़े की पेशवाई आज मंगलवार को प्रयाग में होने के कारण अधिकांश नागा संन्यासी इस समय प्रयाग में हैं।
हरिद्वार अखाड़े के कारोबारियों से कहा गया है कि वे हरिद्वार में मौजूद संतों से अखाड़ा परिषद खाली करा लें। श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि अखाड़े में अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में अन्य मढ़ियों के विवादास्पद बाबाओं के बारे में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।