ग्राम पंचायत में विकास कार्य को लेकर हुई अनबन ने 35 साल पहले साहिया के सैंसा गांव के टुकड़े कर दिए थे।
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पहले विवाद फिर तनाव के बाद गांव के 20 परिवारों में दो धड़े बन गए। आपस में निमंत्रण तक बंद हो गए। एक-दूसरे के घर जाना छोड़ दिया। आपस में एक-दूसरे को भूटी आंख नहीं देखने वाले ग्रामीणों को देव डोरियों ने एकसूत्र में पिरो दिया।
प्यार, सम्मान बहाल हो गया
अब फिर से सैंसा के लोग एक-दूसरे के घरों में जाने लगे हैं। फिर से वही प्यार, सम्मान बहाल हो गया है। कालसी विकासखंड के सैंसा गांव में 20 परिवार रहते हैं। बताया जाता है 35 साल पहले एक ग्रामीण ग्राम पंचायत के तहत विकास संबंधी योजना लेकर आया था।
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इस पर दूसरे ग्रामीण ने खुद के योजना से वंचित रहने पर नाराजगी जताई। यहां से शुरू हुई रार विवाद फिर तनाव और बाद में धड़ेबाजी में बदल गई। गांव के 20 परिवारों में से एक धड़े में 13 तो दूसरे धड़े में 7 परिवार शामिल हो गए।
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धड़ों में बंटे ग्रामीणों ने हर चीज का बंटवारा कर लिया। यहां तक कि सुख-दुख का भी। जैसे शादी समारोह तक के निमंत्रण एक-दूसरे को देने बंद कर दिए गए। निधन होने पर भी दूसरे धड़े के ग्रामीणों ने शामिल होना बंद कर दिया था।
देव पालकी पहुंची तो पूरा गांव एक हो गया
14 दिसंबर को चालदा और महासू देवता की देव पालकी जब सैंसा पहुंची तो पूरा गांव एक हो गया। देव डोरियों ने ग्रामीणों के बीच सुलह कराई। ग्रामीणों का कहना है कि देवता ने एक होने की रजामंदी पर ही गांव आने का निमंत्रण स्वीकारा था।
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बुजुर्ग भगत सिंह चौहान, कल सिंह चौहान का कहना है कि आखिर देवता के आगे नफरत हार गई। एक बार फिर पूरा गांव एक हो गया है। स्याणा दिलीप सिंह ने कहा कि अभी तक गांव के दो गुटों में बंटे होने के कारण भी प्रभावित हो रहे थे। लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल हो सकेंगे।