देहरादून में ईदुल अजहा (बकरीद) की पूर्व संध्या पर हरिद्वार रोड स्थित बकरों का बाजार शबाब पर रहा। शाम को सबसे महंगा बकरा सवा लाख रुपए में बिका। इसे मुसलिम कालोनी के हयात खान ने खरीदा।
मंगल बाजार में बकरे बेचने के लिए व्यापारी तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाते रहे। दुबले बकरों की अच्छी कीमत वसूलने के लिए व्यापारी अरबी शब्दों की आकृति दिखाते रहे।
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बकरा बाजार में आकर्षण का केंद्र
रुड़की के व्यापारी नसीम अहमद का बकरा बाजार में आकर्षण का केंद्र रहा। नसीम ने इसकी कीमत दो लाख रुपए तय की थी जिसे उन्होंने बाद में सवा लाख का बेचा। इसी तरह डेढ़ लाख कीमत का बकरा बाद में नब्बे हजार का बिका।
विकासनगर से आए एक व्यापारी ने अपना बकरा पचास हजार का बेचा। लेकिन सबसे अधिक मार तीन हजार से सात हजार रुपए कीमत के बकरों की रही।
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अरबी शब्दों की आकृति
रात को जब बाजार उखड़ने का वक्त आया तो दुबले बकरों की अच्छी कीमत वसूलने के लिए व्यापारियों ने नए-नए हथकंडे अपनाने शुरु कर दिए। बकरों की पीठ पर सफेद, काले, कत्थई बालों की लकीरों को लोग अरबी शब्दों की आकृति बताने लगे।
सहारनपुर के व्यापारी खरीदारों को बताता रहा कि उसके बकरे की पीठ पर अल्लाह लिखा हुआ है। वह अपने बकरे की दस हजार कीमत मांग रहा था। आखिर में उसकी बकरा साढ़े तीन हजार का बिका।