गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) में कर्मचारियों को वेतन देने में दोहरी नीति अपनाई जा रही है।
एक ओर निगम के पर्यटन सेक्शन के करीब 1800 कर्मचारी एक से लेकर तीन माह से वेतन के लिए तरस रहे हैं, वहीं वीवीआईपी ड्यूटी में लगे निगम कर्मियों को हर माह समय से वेतन दिया जा रहा है। यह स्थिति देख वेतन नहीं मिलने से परेशान कर्मचारियों ने जल्द तनख्वाह नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है।
जीएमवीएन के संयुक्त कर्मचारी मंच के संरक्षक जितेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि निगम सीएम आवास, सीएम कार्यालय, सचिवालय के अधिकारियों, सचिवालय कैंटीन, पर्यटन सचिव, पर्यटन मंत्री के यहां ड्यूटी देने वाले कर्मियों को ही वेतन दे रहा है। अन्य कर्मचारी तीन माह से बिना वेतन के गुजारा कर रहे हैं।
निगम के वीवीआईपी ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को वेतन देने से अन्य कर्मचारियों का रोष बढ़ रहा है। यदि सीएम ने एकमुश्त धनराशि देकर निगम कर्मचारियों की सहायता नहीं की तो कर्मचारी आत्मदाह का रास्ता चुनेंगे। कहा कि निगम की आय बड़े साहबों के यहां काम करने वालों के वेतन पर खर्च हो रही है।
ऐसे करीब 60 कर्मचारियों पर एक महीने में 12 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में दूसरे कर्मचारी यही कह रहे हैं कि अगर वह भी सीएम या बड़े साहब के यहां काम करते तो कम से कम वेतन तो समय पर मिलता। निगम के पर्यटन सेक्शन के 1800 कर्मचारी लगातार वेतन की मांग कर रहे हैं।
इसके बावजूद उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। कर्मचारियों को अब मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक का इंतजार है। यदि इसमें कोई हल नहीं निकलता है और मुख्यमंत्री मदद नहीं करते तो कर्मचारी आत्मदाह करेंगे।
वर्ष 2013 की आपदा के बाद निगम को 77 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। एक ओर निगम वीआईपी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को वेतन दे रहा है, जबकि अन्य कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में सीएम और अधिकारियों को हमारे बारे में सोचना चाहिए।
- एसपी पंत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संयुक्त कर्मचारी मंच, जीएमवीएन
इन्हें हर माह मिल रहा वेतन
मुख्यमंत्री आवास में काम कर रहे 22 कर्मचारियों को हर माह 5 लाख 29 हजार वेतन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में काम कर रहे 19 कर्मचारी साढ़े तीन लाख रुपए प्रतिमाह वेतन ले रहे हैं।
वहीं, सचिवालय कैंटीन में काम कर रहे जीएमवीएन के 18 कर्मचारियों को करीब सवा तीन लाख रुपये सैलरी मिल रही है। इसके अलावा पर्यटन मंत्री और पर्यटन सचिव के यहां काम करने वाले निगम कर्मियों को भी वेतन हर माह मिल रहा है।
करीब 1800 कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन
जीएमवीएन में पर्यटन सेक्शन के करीब 1800 कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। करीब 1000 कर्मचारियों को एक माह से, 300 को तीन महीने और लगभग 500 को दो माह से सैलरी नहीं मिल पाई है।