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आधी जनवरी बीती, बदरीनाथ में बर्फ का पता नहीं

Wed, 13 Jan 2016 06:36 PM IST
प्रमोद सेमवाल/अमर उजाला, गोपेश्वर
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बदरीनाथ धाम भी ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में है। शीतकाल में बर्फ के आगोश में रहने वाला धाम इस बार मध्य जनवरी तक भी बर्फ विहीन है। यहां ऊंची चोटियों पर तो बर्फ जमी है, पर मंदिर के आसपास नाममात्र की ही बर्फ है। पिछले कई वर्षों बाद धाम में यह स्थिति देखने को मिल रही है। मौसम विज्ञानी इसे ग्लोबल वार्मिंग का असर मानते हैं।
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नहीं गिरी बर्फ
बदरीनाथ धाम के कपाट नवंबर माह में शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान धाम बर्फ से ढक जाता है। यहां मध्य दिसंबर से शुरू होनेवाला बर्फबारी का सिलसिला अप्रैल तक चलता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। 18 दिसंबर, 24 दिसंबर और आठ जनवरी को ही धाम में बर्फबारी हुई। चटख धूप खिली तो यह बर्फ भी पिघल गई।

इस बार धाम तक खुली है सड़क
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि जनवरी माह तक बदरीनाथ धाम, हनुमान चट्टी से आगे बदरीनाथ हाईवे पूरी तरह बर्फ से ढक जाता था। पर इस बार बर्फ नहीं होने से धाम तक सड़क खुली है।
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हेमकुंड साहिब में भी बर्फबारी कम

हेमकुंड साहिब में भी बर्फबारी कम हुई है। हालांकि यहां अत्यधिक ठंड से सरोवर जम गया है। सरोवर के इर्द-गिर्द एक फीट बर्फ जमी है, जो अन्य सालों के मुकाबले बेहद कम है।

इनका है कहना
वर्ष 2015 विश्वभर में अभी तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक है। बीते वर्ष अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर सबसे गर्म माह रहे। पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तक सीमित है। आगे भी विक्षोभ के कुछ प्रभाव दिख नहीं रहे हैं। इसका प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है।
-डॉ. एलएस राठौर, महानिदेशक, मौसम विज्ञान एवं शोध केंद्र दिल्ली
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