हिमालय क्षेत्र में हो रही भारी बर्फबारी से ग्लेशियरों की सेहत में सुधार आएगा। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों में पड़ी दरारें अब भरनी शुरू हो जाएंगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक जितनी बर्फ पड़ी है उससे ग्लेशियरों के टूटने की गति भी थमेगी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले गर्म हो रहे वातावरण से ग्लेशियर वैज्ञानिक चिंतित थे। ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे थे। इन क्षेत्रों में हिम रेखा लगातार ऊपर की तरफ जा रही थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर ऐसी बर्फबारी हर साल होती रहे तो इससे ग्लेशियर क्षेत्रों का परिदृश्य पहले जैसा होने लगेगा।
हालांकि वैज्ञानिक जिस जलवायु परिवर्तन को ग्लेशियरों के सिकुड़ने का कारण मान रहे थे, उसी वजह से इतनी अधिक बर्फबारी भी हो रही है। अक्तूबर-नवंबर में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ दिसंबर में आया है। फिर भी इससे हिमालय क्षेत्र को फायदा होने की बात कही जा रही है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अक्षय कुमार का कहना है कि बर्फबारी की ऐसी ही स्थिति आगे भी जारी रही तो छोटे ग्लेशियरों, जिन्हें बामक कहा जाता है, उनको फायदा होगा। यही वजह है कि ढोकरानी, गंगोत्री समेत अन्य क्षेत्रों के गायब हो चुके छोटे ग्लेशियरों के पनपने की उम्मीद जगने लगी है।
ग्लेशियर क्षेत्रों में मानव दखलंदाजी पर लगे रोक वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, हिमनद अध्ययन केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. समीर तिवारी ने कहा कि ऐसा ही मौसम आगे जारी रहा तो स्थितियां बदलेंगी। हालांकि ग्लेशियर क्षेत्रों में मानव दखलंदाजी रोकी जानी भी बहुत जरूरी है। ग्लेशियरों को पीछे खिसकने से रोकने के लिए प्रकृति के साथ-साथ इंसानों को भी सहयोग करना होगा।