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अब जाएंगे निजी हाथों में उत्तराखंड के सरकारी स्कूल 

Fri, 20 Jan 2017 01:48 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : file photo
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प्रदेश में सरकारी अस्पताल और कई बड़ी परियोजनाओं को निजी हाथों में देने के बाद सरकार अब सरकारी स्कूलों को भी पीपीपी मोड में देने जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर पहले चरण में राजधानी के 23 स्कूलों का का चयन किया गया है। इनमें से कुछ स्कूलों की छात्र संख्या 150 से अधिक है।
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विभाग की ओर से चयनित स्कूलों में नगर क्षेत्र के 20 और रायपुर ब्लॉक के तीन स्कूल शामिल हैं। पहले चरण में इन स्कूलों को पीपीपी मोड में दिए जाने के बाद प्रदेश के अन्य स्कूलों को भी पीपीपी मोड में संचालित किया जा सकता है। विभाग की ओर से इसके लिए जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उसमें नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जाखन की छात्र संख्या 195, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर एक ऋषिकेश में 171, राजकीय प्राथमिक विद्यालय अमृतकौर रोड नगर क्षेत्र देहरादून में 71 छात्र हैं।

प्रत्येक स्कूल में टीचरों की संख्या दो से लेकर छह है। जबकि हर स्कूल के पास आधा से लेकर एक बीघा भूमि है। शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा सीमा जौनसारी ने 24 दिसंबर 2016 को मुंबई की संस्था बिडला एडूटेक लिमिटेड को पत्र लिखकर संस्था को स्कूल का सर्वे अपने स्तर से करने को कहा है।
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शिक्षा निदेशक ने कहा कि संस्था अपने स्तर से स्कूल का सर्वे करे ताकि चयनित विद्यालयों को बिडला एडूटेक के साथ पीपीपी मोड में संचालित किया जा सके। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल ऑफ होने से संपर्क नहीं हो सका। 

पीपीपी मोड के लिए चयनित स्कूल 
प्राथमिक विद्यालय जाखन, बापूनगर, चूक्खुवाला नंबर दो, परेड ग्राउंड, आराघर नंबर एक, हकीकतराय नगर, सैयदपुर दो, अमृतकौर रोड, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जाखन, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जाखन, उच्च प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन, मसूरी नगर क्षेत्र का राजकीय प्राथमिक विद्यालय मकडेत, किताबघर, झडीपानी, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुलड़ी बालिका, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुलड़ी बालक, उच्च प्राथमिक विद्यालय किताबघर, ऋषिकेश नगर क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय नाभाहाउस, उच्च प्राथमिक विद्यालय नाभाहाउस, रायपुर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय धोरण, नागल हटनाला एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय नागल हटनाला शामिल हैं। 

स्कूलों को पीपीपी मोड में दिए जाने का प्रस्ताव है। शुरूआत में हमें इसके लिए पार्टनर नहीं मिले, इसके लिए तीन या इससे अधिक पार्टनर मिलने पर टेंडर प्रक्रिया के तहत स्कूलों को पीपीपी मोड में दिया जाएगा।
- दीपेंद्र कुमार चौधरी, अपर सचिव बेसिक शिक्षा

बंद हो रहे सरकारी स्कूल 
सरकारी स्कूलों में लगातार छात्र संख्या घटती जा रही है, पिछले कुछ वर्षों में 1800 स्कूल बंद हो चुके हैं, वही कुछ बंदी की कगार पर है, ऐसे में सरकार अब इन स्कूलों को चलाने के लिए इसे पीपीपी मोड में देना चाहती है। पूर्व में कुछ राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों को भी पीपीपी मोड में दिए जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सरकार को इसके लिए पार्टनर नहीं मिले।
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