अधिकारियों को अभिभावकों ने बताया कि छात्राओं को विद्यालय जाने से नहीं रोका जाता है। हो सकता है कि पूर्व में ऐसी कोई परंपरा रही हो, लेकिन वर्तमान में यह अब नहीं है। इस दौरान टीम ने अभिभावकों, छात्राओं की काउंसलिंग करते हुए कहा कि अच्छी बात है कि ग्रामीण रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ आगे बढ़ रहे हैं।
टीम ने बेटियों को बचाने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया। टीम में मुख्य शिक्षाधिकारी बीपी सिमल्टी, डीपीओ आईसीडीएस राधिक ह्यांकी, निर्भया प्रकोष्ठ की सदस्य आदि शामिल रहे।