फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरनाक जंगल के रास्ते स्कूल जाती हैं यहां बेटियां, नहीं बन रही है सड़क

Sat, 17 Feb 2018 10:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विज्ञापन
village girls, demand, cm,road for school - फोटो : file photo
विज्ञापन
केंद्र और प्रदेश की प्रचंड बहुमत वाली सरकारों के बेटी बचाओ के नारे के बीच रुद्रप्रयाग के एक गांव की बेट‌ियां स्कूल जान हथेली पर रखकर जा रही हैं। केदार आपदा के दौरान रास्ता ध्वस्त हो गया था, जिसे आज तक नहीं बनाया जा सका है। 
विज्ञापन

सुनसान संकरे रास्ते से घने जंगलों के बीच उन्हें जंगली जानवरों का भय सताता रहता है। स्कूली बच्चे रास्ते में कई जगहों पर घास पकड़कर आगे बढ़ते हैं। पैदल मार्ग पर दो तरफा खतरा बना है। कब कहां पर पैर फिसल जाए और कब, कोई जंगली जानवर हमला कर दें, कहा नहीं जा सकता। केदारघाटी के तरसाली गांव की ये छात्राएं जीआईसी फाटा में हाईस्कूल में पढ़ती है। गांव के लोग भी लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य निर्माण के बाद से तरसाली के 20 परिवार सड़क की आशा में जी रहे हैं। आज भी घर तक पहुंचने के लिए फाटा से एक तरफा साढ़े छह किमी पैदल नाप रहे हैं, जिसमें  साढ़े तीन किमी खड़ी चढ़ाई वाला जंगल का रास्ता भी है। स्कूल की छात्राएं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुरोध करती हैं क‌ि वे पांच साल से पैदला स्कूल जा रही हैं, उनके ल‌िए सड़क बनवा दीज‌िए।
 ग्रामीण जगतराम सेमवाल, प्रियधर अंथवाल व महिला मंगल दल अध्यक्षा इंदु देवी ने बताया कि जून 2013 की आपदा में यह रास्ता कई जगहों में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसकी आज तक किसी ने सुध नहीं ली है। वर्ष 2015 में तत्कालीन विधायक शैलारानी रावत को फाटा से गांव तक हल्का मोटर मार्ग निर्माण का प्रस्ताव सौंपा था। उन्होंने लोनिवि को दिया, जिस पर आज तक शासन स्तर से कार्रवाई नहीं हो पाई है। इधर, लोनिवि के ईई मनोज दास ने बताया कि मार्ग का प्रारंभिक सर्वेक्षण कर फाइल विभागीय स्तर से शासन को भेजी जा चुकी है। लेकिन अभी तक कोई जबाव नहीं मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें