मां को खो देने के बाद खुद अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही बिटिया की राह में पिता और भाई ने ही रोड़े अटकाए लेकिन बुलंद हौसले वाली बिटिया ने आखिरी दम तक अपनी लड़ाई लड़ी। आखिरकार पिता-भाई को घुटने टेकने ही पड़े।
यह मामला कस्बा लक्सर की रहने वाली एक 25 वर्षीय युवती का है। पेशे से नर्स युवती की मां कुछ माह पूर्व चल बसी। नर्स का कोर्स कर चुकी युवती अभी तक काम नहीं करती थी। मां की मौत के बाद उसने नौकरी करने का फैसला किया। पिता और भाई को उसका यह फैसला पसंद नहीं आया। उन्होंने उसे नौकरी करने से तो रोका ही आरोप है कि उसके साथ मारपीट तक की गई। युवती का घर की चौखट से निकलना भी दूभर कर दिया।
जैसे तैसे घर से निकलकर शहर के एक नर्सिंग होम में आकर नौकरी कर ली। मगर, यहां भी अपनों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। आरोप है कि नर्सिंग होम में आकर भी उसे प्रताड़ित किया जाता था और उसे नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इस पर बिटिया ने अपने भाई और पिता के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर में दस्तक दी।
अपने दो पन्नों के शिकायती पत्र में बिटिया ने जो कुछ लिखा वह बहुत ही मार्मिक था। अपने भाई पिता से जान तक का खतरा बताते हुए उसने लिखा कि वह अपने पैरों पर खड़े होना चाहती है, आखिर फिर उसे क्यों रूढ़िवादी सोच के चलते रोका जा रहा है। वह अपनी मर्जी से ही घर छोड़ रही है, उस पर किसी का दबाव नहीं है।
आखिर वह जीना चाहती है और अपने दम पर कुछ करना चाहती है। पुलिस ने युवती के पिता और भाई को बुलाकर समझाया कि युवती बालिग है और अपनी मर्जी से अगर अपना करियर बनाना चाहती है तो वह उसका अधिकार है।
जांच कर रहे दारोगा वीरेंद्र नेगी ने परिजन की तरह पिता और भाई को यह भी समझाया कि बेटी अगर बढ़ेगी तो परिवार का नाम रोशन ही करेगी उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए लेकिन अगर जबर्दस्ती रोका गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के समझाने का असर यह हुआ कि पिता और पुत्र दोनों ने अपने कदम पीछे खींच लिए।