बेटियां अब जिंदगियों को बचाने में नहीं बल्कि जंगल बचाने में भी आगे आ रही हैं। दमखम से लेकर दिमाग तक की कड़ी परीक्षा के रेंजर्स कोर्स में ही पिछले तीन साल से बेटियां ही चैंपियन बनती आ रही हैं। यही हाल एमबीबीएस कोर्स का है। बेटियों की प्रतिभा के इनके शिक्षक भी कायल हो रहे हैं।
फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में देश के अलग-अलग राज्यों से प्रशिक्षु पहुंचते हैं। 18 महीने का रेंजर कोर्स में केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक दमखम का कड़ी परीक्षा होती है। फायरिंग से लेकर पढ़ाई के अलग-अलग कोर्स में अव्वल आने पर ही ओवर आल चैंपियन जैसा खिताब मिलता है।
रेंजर्स कोर्स में बेटियां अब आगे आ रही हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक रेजर्स कोर्स में कुल पदों के सापेक्ष छह गुना तक बेटियां शामिल होने के लिए पहुंच रही हैं। पिछले तीन साल के परिणाम पर नजर डाले तो साफ हो रहा है कि बेटियों का यहां प्रदर्शन भी अव्वल ही है। पिछले तीन 2011-12 में संगीता मुधकर ऑवरऑल चैंपियन बनीं। 2013-2014 में विधि सिरोलिया ने सबको पीछे छोड़ा। 2015-16 के बैच में रूमन अब्दुला ने टॉप किया है।