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निक्की के हौंसले से बची मां और भाई की जान

Thu, 13 Feb 2014 07:11 PM IST
अमर उजाला, कोटद्वार
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बुरी तरह खून से लथपथ होने के बाद भी निक्की बहादुरी नहीं दिखाती तो उसकी मां और भाई भी मौत के मुंह में समा सकते थे।
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दोनों को बचाने के बाद बुरी तरह से घायल निक्की लंबे समय तक अर्द्धचेतना की स्थिति में रही। अब उसे होश आया तो वह घटना को याद करते सिहर उठती है।

नौ फरवरी को हुआ था हादसा
रविवार नौ फरवरी की रात को बालासौड़ गोकुल विहार कालोनी निवासी निक्की अपने माता, पिता, भाई, सहेली और चचेरे भाई के साथ शेरकोट (घामपुर) से पारिवारिक समारोह से कोटद्वार लौट रही थी। उसके पिता उदयराज चौहान अपनी इंडिगो कार चला रहे थे।

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अचानक नजीबाबाद-कोटद्वार रोड पर समीपुर के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। कार के खाई में गिरते ही उसके पिता, सहेली और चचेरे भाई ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। मां और भाई गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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कार का शीशा तोड़कर बाहर आई
नजीबाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही निक्की ने अब होश आने पर बताया कि उस दिन कार गिरने के बाद वह बेहोश हो गई थी।

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होश आया तो कार के भीतर से उसे अपने भाई के चीखने की आवाज सुनाई दी। वह जख्मी हालत में पलटी। कार का शीशा तोड़ा और बाहर आई।

दर्द की नहीं की परवाह
अपने दर्द की परवाह किए बगैर खाई से सड़क पर पहुंचकर सहायता के चिल्लाकर वाहनों को रोकने के लिए हाथ दिया, लेकिन खून से लथपथ निक्की की मदद के लिए कोई नहीं रुका। उसके चिल्लाने पर नजदीक आकाशवाणी रिले सेंटर के गार्ड आए।

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उन्होंने आकाशवाणी कर्मियों की मदद से घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने से निक्की के भाई और माता को हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया। वर्तमान में उनकी माता सर्वेश देवी दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल में और भाई प्रफुल्ल मेरठ में भर्ती है। डाक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से दोनों की जान बच पाई है।
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सम्मान देने की मांग
श्री शिव शक्ति मंदिर जनजागरण समिति के संयोजक नंदलाल धनगर ने उत्तराखंड के राज्यपाल से बहादुर बेटी निक्की को सम्मान देने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने कहा कि निक्की ने विषम परिस्थितियों में अंधेरे में जख्मी हालत में कार का शीशा तोड़ खाई से बाहर निकलने और सड़क पर मदद लेने का साहसिक कार्य किया है। जिसके लिए उसे सम्मानित किया जाना चाहिए।
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