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मंदिर में पूजा करने गई युवती के ऊपर गिरी मंदिर की छत, मलबे में दबकर हुई मौत

Mon, 18 Jun 2018 11:04 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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roof collapse
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देहरादून की कुम्हार मंडी स्थित करीब 71 साल पुराने मंदिर की छत ढहने से एक युवती की मौत हो गई। जबकि, मंदिर में मरम्मत का काम कर रहा एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि मंदिर की मरम्मत का काम करा रहे ठेकेदार ने छत को आधा तोड़कर छोड़ दिया था। घायल मजदूर को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने युवती के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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जानकारी ने अनुसार यमुना कॉलोनी निवासी संगीता (20) पुत्री तारा चंद सुबह करीब नौ बजे कुम्हार मंडी स्थित शिव-पार्वती मंदिर में पूजा करने गई थी। वह पूजा कर ही रही थी कि अचानक मंदिर की आधी तोड़ी गई छत ढह गई और संगीता मलबे में दब गई। वहीं, मंदिर में काम कर रहा कांवली रोड निवासी मजदूर दलीप गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोग एक घंटे तक मलबा हटाने में लगे रहे। काफी मशक्कत के बाद संगीता को बाहर निकाला गया। लोग उसे लेकर मसूरी रोड स्थित मैक्स अस्पताल पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

लोगों के अनुसार इन दिनों मंदिर की मरम्मत का काम चल रहा था। आरोप है कि ठेकेदार ने मंदिर का लेंटर तोड़कर अधूरा छोड़ दिया था। यही अधूरा लेंटर सोमवार को ढह गया। संगीता की मां ने देर शाम पुलिस को मामले में तहरीर दी। उन्होंने मंदिर की मरम्मत का काम करा रहे ठेकेदार अशोक कुमार प्रजापति को हादसे के लिए जिम्मेदार बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। कैंट थाने के इंस्पेक्टर एसएस बिष्ट ने बताया कि मामले में ठेकेदार अशोक कुमार प्रजापति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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देर से पहुंची एसडीआरएफ

संगीता
1947 में हुआ था मंदिर स्थापित
कुम्हार मंडी स्थित शिव पार्वती मंदिर वर्ष 1947 में स्थापित हुआ था। मंदिर की दीवारें और छत जर्जर हो चुकी थी। स्थानीय लोगों के सहयोग से पिछले एक महीने से मंदिर की मरम्मत का काम चल रहा था। लोगों का कहना है कि ठेकेदार बेहद धीमी गति से काम कर रहा था। बीच-बीच में काम बंद भी कर दिया जाता था। ऐसे में हमेशा हादसे का खतरा बना रहता था।

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी संगीता
बताया जा रहा है कि संगीता पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। पिता की तारा चंद की मृत्यु के बाद पांचों बच्चों की जिम्मेदारी मां कमलेश देवी पर थी। संगीता ने इसी वर्र्ष नजीबाबाद से 12वीं की परीक्षा पास की थी और वह बीए में दाखिले की तैयारी कर रही थी। संगीता की मौत की खबर सुनते ही मां और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

देर से पहुंची एसडीआरएफ
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि हादसे की सूचना के बावजूद एसडीआरएफ की टीम काफी देर से पहुंची। अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उनके उपकरण काम नहीं कर रहे थे। इस पर मजदूरों के फावड़े-बेलचे से मलबा हटाया गया। लोगों का कहना है कि हादसा ठेकेदार की लापरवाही के कारण हुआ। लोगों के अनुसार अधूरी तोड़ी गई छत को ऐसे ही छोड़ दिया गया था। जबकि, इसे स्पोर्ट देना चाहिए था। वहीं, मंदिर में निर्माण कार्य जारी होने के बावजूद लोगों की आवाजाही जारी थी। अब हादसे के बाद गेट पर ताला लगा दिया गया है।
 
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