1947 में हुआ था मंदिर स्थापित
कुम्हार मंडी स्थित शिव पार्वती मंदिर वर्ष 1947 में स्थापित हुआ था। मंदिर की दीवारें और छत जर्जर हो चुकी थी। स्थानीय लोगों के सहयोग से पिछले एक महीने से मंदिर की मरम्मत का काम चल रहा था। लोगों का कहना है कि ठेकेदार बेहद धीमी गति से काम कर रहा था। बीच-बीच में काम बंद भी कर दिया जाता था। ऐसे में हमेशा हादसे का खतरा बना रहता था।
पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी संगीता
बताया जा रहा है कि संगीता पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। पिता की तारा चंद की मृत्यु के बाद पांचों बच्चों की जिम्मेदारी मां कमलेश देवी पर थी। संगीता ने इसी वर्र्ष नजीबाबाद से 12वीं की परीक्षा पास की थी और वह बीए में दाखिले की तैयारी कर रही थी। संगीता की मौत की खबर सुनते ही मां और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
देर से पहुंची एसडीआरएफ
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि हादसे की सूचना के बावजूद एसडीआरएफ की टीम काफी देर से पहुंची। अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उनके उपकरण काम नहीं कर रहे थे। इस पर मजदूरों के फावड़े-बेलचे से मलबा हटाया गया। लोगों का कहना है कि हादसा ठेकेदार की लापरवाही के कारण हुआ। लोगों के अनुसार अधूरी तोड़ी गई छत को ऐसे ही छोड़ दिया गया था। जबकि, इसे स्पोर्ट देना चाहिए था। वहीं, मंदिर में निर्माण कार्य जारी होने के बावजूद लोगों की आवाजाही जारी थी। अब हादसे के बाद गेट पर ताला लगा दिया गया है।