दोनों को तैरना नहीं आता था। दोनों किसी तरह कोमल को नदी से निकाल लाए। बेहोश कोमल को लेकर सड़क पर पहुंचे और एक टैक्सी चालक ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
समय पर उपचार मिलता को बच सकती थी कोमल की जान
मासूम कोमल को समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी, लेकिन मेले में न तो उपचार की सुविधा थी और न ही सुरक्षा के इंतजाम। डूबने के करीब पांच मिनट के अंदर ही परिजनों ने कोमल को नदी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन घटनास्थल से सड़क तक पहुंचने और फिर टैक्सी से अस्पताल पहुंचने में ज्यादा समय लगने से मासूम की जान चली गई। राजू ने बताया कि नदी से निकालने के बाद कोमल की नब्ज चल रही थी। रास्ते में भी चेक किया तो वह जिंदा थी, लेकिन अस्पताल पहुंचे तो डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
शारदा घाट पर बस खड़ी कर पैदल जा रहे थे
कोमल के परिजन और रिश्तेदार भी प्राइवेट बस से आए थे, लेकिन किसी ने उनसे कहा कि नदी के पास तक बस जाने पर प्रतिबंध लगा है। इस पर उन्होंने शारदा घाट पर बस खड़ी कर टनकपुर से बूम तक शारदा किनारे-किनारे पैदल रास्ते से पूर्णागिरि जाने का फैसला लिया, जबकि प्राइवेट बसें बूम पार्किंग स्थल तक जा रही है।