बंद कमरे में घटना होने की दी दलील
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों की शादी को 22 साल हो चुके हैं और विवाद घरेलू व आर्थिक प्रकृति का है। अधिवक्ताओं ने कहा कि कथित जातिसूचक टिप्पणी निजी बंद कमरे में की गई थी, जहां आम जनता की मौजूदगी नहीं थी। राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद सिंह ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि मंत्री के सरकारी आवास पर स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
अदालत ने माना कि निजी परिसर में भी अन्य लोगों की मौजूदगी में अपमान होने पर वह स्थान पब्लिक व्यू के दायरे में आ सकता है। कर्मचारियों की मौजूदगी और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच साक्ष्यों के आधार पर होगी। अदालत ने एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत अग्रिम जमानत पर कानूनी प्रतिबंध को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।