जौनसार-बावर क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टमाटर और हरे धनिये में भारी घाटा सह चुके किसानों को अब अदरक की फसल से भी निराशा हाथ लग रही है। मंडियों में अदरक का भाव पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल से नीचे लुढ़क गया है। वहीं, खेतों में बारिश की कमी और बीमारी (सड़न-गलन) के कारण फसल सूखकर पीली पड़ रही है। गिरते दाम और चौपट होती पैदावार ने किसानों पर दोहरी मार दी है।
क्षेत्र के ककाड़ी गांव निवासी भगत सिंह बिष्ट, अलसी के दिनेश बिष्ट, दातनु के विशन सिंह व प्रीतम सिंह चौहान और विनऊ के हुकम सिंह तोमर ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत अदरक की फसल बीमारी की चपेट में आकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। बारिश न होने से खेतों में नमी खत्म हो गई है, जिससे फसल की बढ़वार भी रुक गई है। किसानों के सामने रबी की दूसरी फसल बोने के लिए खेत खाली करने की मजबूरी है। ऐसे में वे आनन-फानन में बची-खुची फसल मंडी ले जा रहे हैं, लेकिन वहां औंधे मुंह गिरे भाव उनकी चिंता बढ़ा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि अदरक की खेती में लागत और मेहनत दोनों अधिक लगती है। अब उनके सामने बीज की लागत निकालने और कृषि लोन की भरपाई करने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने कृषि विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि फसलों में लग रहे रोगों की रोकथाम और मार्गदर्शन के लिए विभागीय स्तर पर पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
वर्तमान में किसी भी मंडी में अदरक के दाम ठीक नहीं चल रहे हैं। इससे किसान और व्यापारी, दोनों ही मुश्किल में हैं। हालांकि, जैसे-जैसे बाजार में अदरक की मांग बढ़ेगी, किसानों को फसल के अच्छे और उचित भाव मिलने की पूरी उम्मीद है। - मनोज पंवार, उपाध्यक्ष, कृषि मंडी समिति