भूस्खलन से सात दिन से बंद हुए यमुनोत्री हाईवे को खुलने में अभी एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे खतरे को देखकर भूवैज्ञानिक भी सकते में आ गए हैं। उनके अनुसार यह समय मौसम और पहाड़ी पर अटके मलबे पर निर्भर है।
वहीं जिला प्रशासन ने यातायात सुचारु करने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय 19 तारीख मंगलवार को जीएसआई की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
रविवार को पत्रकार वार्ता में डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भूवैज्ञानिकों की ओर से दी गई प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार ओजरी में 2500 वर्ग मीटर का हिस्सा भूस्खलन से प्रभावित है, जिसमें दो स्लाइड जोन से बोल्डर मलबा गिर रहा है।
जबकि इन दोनों के बीच तीसरा स्लाइड जोन भी बन रहा है। अध्ययन के अनुसार क्षेत्र में कभी ग्लेशियर रहा होगा, जिससे पहाड़ की परत ढीली हो गई है। करीब 2007 से यह स्लाइड जोन सक्रिय होने लगा था, जो अब रौद्र रूप धारण कर चुका है। भूस्खलन कब रुकेगा इसका अनुमान जीएसआई की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही लगाया जा सकता है।
पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण
डीएम ने कहा कि राजमार्ग सुचारु करने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना तैयार की गई है। एक मार्ग ओजरी में मौजूद वर्तमान सड़क के नीचे से ही बनाया जा सकता है। यह करीब डेढ़ किमी लंबा होगा, जिसमें तारों का जाल लगाकर सुरक्षा दीवार तैयार की जाएगी। इसे लगभग एक सप्ताह में बनाया जा सकता है।
वहीं दूसरा मार्ग नदी पार तिर्खली गांव से बनाया जा सकता है, जो 5 किमी लंबा होगा और जिसके बनने में अनुमानित 15 दिन का वक्त लगेगा। दोनों मार्गों के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर दी गई है, लेकिन अंतिम निर्णय मंगलवार को ही लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि गंगनाणी से खरसाली तक हेली सेवा शुरू करने के लिए प्रमुख सचिव को पत्र भेज दिया गया है। ओजरी में बनाए गए पैदल मार्ग से रविवार को करीब 400 यात्रियों को यमुनोत्री धाम भेजा गया है।
ओजरी-डबरकोट में हो रहे भूस्खलन से ओजरी गांव की पेयजल लाइन ध्वस्त हो गई है, जिससे ग्रामीणों को पानी की दो बूंद के लिए भी तरसना पड़ रहा है। करीब एक सप्ताह से पानी की सप्लाई बंद होने के कारण ग्रामीणों को गदेरे से पानी लाना पड़ रहा है।
प्रधान पुष्पा चौहान ने बताया कि ओजरी गांव का पेयजल स्रोत डबरकोट पहाड़ी पर स्थित था, जो भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। प्रशासन एवं जल संस्थान को कई बार शिकायत करने के बाद भी गांव के लिए वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोगों को गदेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। उधर, तहसीलदार बुद्धि सिंह रावत ने कहा कि जल संस्थान को ओजरी गांव में वैकल्पिक जल स्रोत बहाल करने के निर्देश दे दिए गए हैं।