वन रैंक, वन पेंशन लागू करने को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही केंद्र की यूपीए सरकार को पूर्व थल सेनाध्यक्ष और गाजियाबाद से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी जनरल (सेनि) वीके सिंह ने कठघरे में खड़ा किया है।
सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार इस मसले पर पूर्व सैनिकों को मिसगाइड कर रही है। जनरल की मानें तो केपी सिंह देव कमेटी ने पहले ही वन रैंक, वन पेंशन की व्यवस्था मान ली थी, दिक्कत सिर्फ वर्ष 2014 के रेट से पेंशन देने की थी।
सिंह ने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने खुद भी वर्ष 2012 में रक्षा मंत्री को कई पत्र लिखे थे।
जनरल वीके सिंह शुक्रवार शाम सोसाइटी एरिया क्लेमेंटटाउन में भाजपा की चुनावी सभा में पूर्व सैनिकों को संबोधित कर रहे थे।
नक्सलवाद है सबसे बड़ी समस्या
उन्होंने नक्सलवाद को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। कहा, सरकार की लचर नीति के चलते नक्सलवाद 50 से 300 स्थानों तक फैल गया है। लगाम न कसी गई तो हर दरवाजे पर नक्सलवादी दस्तक देने लगेंगे।
काले धन के मसले पर उन्होंने कहा कि देश का पैसा बाहर नहीं, बल्कि बाहर का पैसा देश में आना चाहिए। सिंह ने कहा कि विदेशी सरकारें भी नहीं चाहतीं कि भारत में मजबूत सरकार आए।
सेना की विशेषताओं की चर्चा करते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि सेना में जाति, धर्म, वर्ग का कोई भेद नहीं, मानव सेवा की भावना ही सर्वोपरि होती है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में देश को इस कदर बांटने की कोशिश की गई, जितनी अंग्रेजों ने भी नहीं की थी।
नरेंद्र मोदी को बताया दमदार नेता
जवानों के बाद किसानों का दर्द उठाते हुए सिंह ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। लेकिन, गलत सरकारी नीतियों से हर घंटे एक किसान खुदकुशी पर मजबूर है।
भंडारण की बेहतर व्यवस्था न होने से अनाज और सब्जियां सड़ रही हैं। राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि अमेठी संसदीय क्षेत्र को अति विशिष्ट दर्जा हासिल है। इसके बावजूद वहां आज भी करीब 90 फीसदी घर कच्चे हैं।
सिंह ने कहा कि देश में मजबूत राष्ट्रवादी सोच की सरकार आना चाहिए जो अपने फैसला दृढ़ता से ले। नेता वही होना चाहिए, जिसकी क्षमताओं पर संदेह न हो। गुजरात के विकास की तारीफ करते हुए कहा कि भाजपा के पीएम पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ऐसे ही नेता हैं।
‘आपदा में सेना को बुलाने में हुई देरी’
जनरल वीके सिंह ने आपदा के मसले पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को भी घेरा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में आई आपदा के वक्त प्रदेश सरकार ने सेना को बुलाने में देरी की थी।
आरोप लगाया कि प्रदेश आपदा से जूझ रहा था और तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विदेश जाने के चक्कर में दिल्ली में बैठे थे। सिंह ने कहा कि सेना जल्दी आ जाती तो आपदा में फंसे लोगों को और जल्दी राहत मिल सकती थी।
केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत अधिक ऊंचाई वाले तीर्थस्थलों की व्यवस्था सेना के हवाले करने के सवाल पर पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि दिक्कत यह है कि सिविल इंतजाम फेल होने के बाद ही सेना को बुलाया जाता है।
सेना व्यवस्था बनाकर समस्या दूर करती है। इसके बाद शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह व्यवस्था बनाए रखे।